छत्तीसगढ़ में बाघ गणना होगी हाईटेक, AI और मोबाइल एप से होगी पहचान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाघों की गणना अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर हाईटेक और डिजिटल प्रणाली से की जा रही है। इस बार बाघों की पहचान और संख्या निर्धारण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे गणना की सटीकता और पारदर्शिता दोनों बढ़ेगी।
वन विभाग के अनुसार, प्रदेश में बाघों की अनुमानित संख्या पहले 17 से बढ़कर अब 35 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह राज्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
मोबाइल एप “एम-स्ट्रिप” से होगी गणना
बाघों की गणना के लिए मोबाइल एप “एम-स्ट्रिप (M-STrIP)” का उपयोग किया जा रहा है। फील्ड में कार्यरत वनकर्मी मैनुअल रूप से एकत्र किए गए साक्ष्य—जैसे
बाघों के पैरों के निशान (पगमार्क),
कैमरा ट्रैप से प्राप्त फोटो-वीडियो,मल, खरोंच और अन्य संकेत
इन सभी जानकारियों को सीधे एप के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड कर रहे हैं। इससे डेटा रियल-टाइम में सुरक्षित और प्रमाणिक रूप से संकलित हो रहा है।
चारों टाइगर रिजर्व और अभ्यारण्यों में सर्वे जारी
राज्य के चारों टाइगर रिजर्व के साथ-साथ उन अभ्यारण क्षेत्रों में भी गणना जारी है, जहां बाघों की आवाजाही (मूवमेंट) दर्ज की गई है। इससे बाघों के विस्तार क्षेत्र और उनकी गतिविधियों पर भी स्पष्ट जानकारी मिलेगी।🧾 पहली बार पूरी तरह पेपरलेस प्रक्रियाइस बार बाघ गणना की पूरी प्रक्रिया पेपरलेस रखी गई है। डिजिटल माध्यम से संकलित सभी आंकड़ों और साक्ष्यों की रिपोर्ट तैयार कर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) को भेजी जाएगी।वन विभाग का मानना है कि AI तकनीक और डिजिटल एप के उपयोग से न केवल गणना अधिक विश्वसनीय होगी, बल्कि भविष्य की संरक्षण रणनीतियों को भी मजबूती मिलेगी।




