छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास में पहली बार: 120 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने देखी विधानसभा की कार्यवाही

रायपुर। छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास में आज एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक घटना दर्ज हुई। पहली बार बड़ी संख्या में आत्मसमर्पित नक्सली छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखने रायपुर पहुंचे। कुल 120 सरेंडर नक्सलियों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठकर सदन की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
इस दल में झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड माने जाने वाले चैतू की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। विधानसभा अध्यक्ष की आसंदी से सदन को इनके आगमन की विशेष सूचना दी गई, जो आमतौर पर केवल विशिष्ट अतिथियों के लिए दी जाती है।
लोकतंत्र से जोड़ने की पहलविधानसभा आगमन से एक दिन पूर्व, गुरुवार को इन पूर्व नक्सलियों ने गृह मंत्री विजय शर्मा के रायपुर स्थित निवास पर आयोजित रेड-कार्पेट डिनर में भाग लिया था। शुक्रवार को उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित राज्य मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात की।
इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है, ताकि पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूती मिल सके।
कड़े सुरक्षा इंतजामइस दौरान छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आत्मीय संवाद
विधानसभा परिसर में युवाओं की विष्णुदेव साय से आत्मीय मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री ने ‘जय जोहार’ के साथ सभी का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार पुनर्वास का निर्णय लेने वाले युवाओं का हृदय से अभिनंदन करती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि सभी पुनर्वासित युवा सम्मानपूर्वक जीवन, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर संविधान के मंदिर में खड़े होकर लोकतंत्र को देखना इस बात का प्रमाण है कि परिवर्तन संभव है। उन्होंने युवाओं को शिक्षा, स्वरोजगार और शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
‘गन’तंत्र छोड़ गणतंत्र में लौटने वालों का स्वागत – उपमुख्यमंत्री
विजय शर्मा ने कहा कि जो युवा ‘गन’तंत्र का रास्ता छोड़कर गणतंत्र की मुख्यधारा में आए हैं, उनका राज्य सरकार पूरे सम्मान के साथ स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि संविधान का मार्ग ही शांति, विकास और समृद्धि का स्थायी रास्ता है। सरकार पुनर्वासित युवाओं के रोज़गार, कौशल विकास और सम्मानजनक भविष्य के लिए निरंतर प्रयासरत है।
पुनर्वासित युवाओं का संकल्प
युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को नज़दीक से देखने का यह अवसर उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि वे अब संविधान और कानून के दायरे में रहकर समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।




