छत्तीसगढ़

नक्सल मोर्चे पर सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी, धमतरी और गरियाबंद में जंगलों से हथियारों का जखीरा बरामद

धमतरी/ गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को लगातार महत्वपूर्ण सफलताएँ मिल रही हैं। इसी क्रम में धमतरी और गरियाबंद जिलों के नक्सल प्रभावित इलाकों में चलाए गए सघन सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा छुपाकर रखे गए हथियारों और अन्य सामान का बड़ा डंप बरामद किया गया है। इन कार्रवाइयों से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति को मजबूती मिली है।

धमतरी: पंडरीपानी जंगल में छुपा था नक्सलियों का हथियार डंप

धमतरी जिले के पंडरीपानी जंगल क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने सर्चिंग अभियान के दौरान नक्सलियों का छुपाया हुआ डंप खोज निकाला। इस कार्रवाई में ऑटोमेटिक राइफल, SLR, 12 बोर बंदूक और भरमार बंदूक जैसी घातक हथियार बरामद की गई हैं। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह सफलता हाल ही में सरेंडर करने वाली एक महिला नक्सली की निशानदेही पर मिली। महिला नक्सली द्वारा दी गई सटीक जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद यह डंप सामने आया।

गरियाबंद: रछापथर–शोभा जंगल से AK-47 समेत हथियार बरामद

गरियाबंद जिले के रछापथर–शोभा जंगल क्षेत्र में भी सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों का हथियार डंप बरामद किया है। इस इलाके से AK-47 और 12 बोर बंदूक मिलने की पुष्टि हुई है।यह कार्रवाई भी सरेंडर किए गए नक्सलियों की निशानदेही पर की गई। उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पहले ही गरियाबंद क्षेत्र में 9 नक्सलियों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को नक्सली ठिकानों और हथियारों से जुड़ी अहम जानकारियाँ मिलीं।

समझिए पूरी कार्रवाई का महत्व

यह बरामदगी क्यों अहम है? – नक्सली जंगलों में हथियार छुपाकर रखते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर बड़ी हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जा सके। ऐसे में हथियारों का मिलना संभावित हमलों को पहले ही नाकाम करता है।

सरेंडर का क्या असर दिख रहा है?– लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से नक्सली संगठन कमजोर हो रहा है और सुरक्षाबलों को अंदरूनी नेटवर्क की सटीक जानकारी मिल रही है।

आगे क्या कदम होंगे? – सुरक्षाबल आने वाले दिनों में सर्च ऑपरेशन और तेज करेंगे, वहीं नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति, विकास और प्रशासनिक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

नक्सलियों पर बढ़ता दबाव

धमतरी और गरियाबंद में हुई इन कार्रवाइयों से साफ है कि नक्सलियों पर सुरक्षाबलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। साथ ही 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश नक्सल मुक्त होने की राह पर है। हथियारों की बरामदगी और आत्मसमर्पण की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में अहम प्रगति हो रही है।

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CG Bulletin Desk1

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