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धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट के रुख से छत्तीसगढ़ में सियासी उबाल; धनेंद्र साहू ने उठाए सवाल, सुनील सोनी ने बताया ऐतिहासिक

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों और फैसलों ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है। राजधानी रायपुर में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जहाँ पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने इसे संवैधानिक पेचीदगियों से जोड़कर देखा है, वहीं भाजपा विधायक सुनील सोनी ने इसे देश को खंडित होने से बचाने वाला फैसला करार दिया है।

“क्या धर्म बदलने से बदल जाती है जाति?”पूर्व पीसीसी अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता धनेंद्र साहू ने इस मामले पर बेहद नपा-तुला लेकिन गंभीर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सोच-समझकर और गहन अध्ययन के बाद आया होगा, जिस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।हालांकि, उन्होंने एक बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा:”आरक्षण का आधार वर्ग और जाति को बनाया गया था। अब विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या धर्म परिवर्तन करने से व्यक्ति का मूल वर्ग और जाति भी परिवर्तित हो जाती है? इस पर केवल कानून और संविधान के विशेषज्ञ ही स्पष्ट राय दे पाएंगे – धनेंद्र साहू,पूर्व पीसीसी अध्यक्ष

प्रलोभन देने वालों के लिए बड़ी चेतावनी”दूसरी ओर, भाजपा विधायक सुनील सोनी ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने इसे सनातन संस्कृति और देश की अखंडता की जीत बताया। सोनी ने कहा:देश की सुरक्षा: इस फैसले से उन ताकतों को लाभ नहीं मिलेगा जो देश को खंडित करना चाहते हैं।प्रलोभन पर रोक: जो लोग लालच देकर भोली-भाली जनता को बहलाते हैं, वे अब सचेत रहेंगे।संस्कारों की रक्षा: किसी को अध्यात्म और हिंदू संस्कारों से अलग करना पाप है। हम किसी धर्म के विरोधी नहीं हैं, लेकिन समाज को बिखेरना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा – सुनील सोनी,बीजेपी नेता

क्या है विवाद की जड़?

सुप्रीम कोर्ट के इस संज्ञान के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा धर्म परिवर्तन के बाद भी बरकरार रहना चाहिए। वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, SC आरक्षण मुख्य रूप से उन वर्गों के लिए है जो ऐतिहासिक रूप से हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म का हिस्सा रहे हैं। भाजपा लंबे समय से मांग करती रही है कि धर्मांतरण करने वालों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाना चाहिए, जिसे ‘डी-लिस्टिंग’ का मुद्दा भी कहा जाता है।

आगामी चुनाव और सामाजिक समीकरण: छत्तीसगढ़ में आदिवासी (ST) और अनुसूचित जाति (SC) की आबादी निर्णायक भूमिका में है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों और राजनीतिक बयानों का असर आने वाले समय में प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ना तय है।

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CG Bulletin Desk1

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