धान सत्यापन के नाम पर किसानों के अपमान का आरोप, खौना समिति में भौतिक सत्यापन का विरोध, बिना जांच टोकन जारी करने की मांग

रायपुर। धान खरीदी के अंतिम चरण में बार-बार किए जा रहे सत्यापन से किसान गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। खौना समिति द्वारा किए जा रहे भौतिक सत्यापन का किसानों ने कड़ा विरोध करते हुए इसे अपमानजनक बताया। किसानों का कहना है कि सरकार कभी सत्यापन अनिवार्यता समाप्त करने का मौखिक आदेश देती है, तो कभी दोबारा सत्यापन को अनिवार्य कर दिया जाता है, जिससे असमंजस और परेशानी बढ़ रही है।
किसानों के अनुसार धान बेचने से पहले ही खेत की गिरदावरी, पटवारी की रेंडम जांच, एग्री-स्टेक पोर्टल पर पंजीयन, समिति में कैरी-फॉरवर्ड, धान आवक से पहले ऑनलाइन प्रविष्टि और खरीदी केंद्र पर जांच जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी कराई जाती हैं। इसके बावजूद टोकन काटने से पहले फिर से भौतिक सत्यापन करना किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान करने वाला कदम है।
आज खौना समिति क्षेत्र में विभिन्न किसानों के कोठारों में भौतिक सत्यापन किया जा रहा था। किसान नेतराम वर्मा के खलिहान में जांच के दौरान किसानों ने विरोध जताते हुए मांग की कि जिन किसानों का टोकन अब तक नहीं कटा है, उन्हें बिना अतिरिक्त जांच के तत्काल टोकन जारी किया जाए।
किसान नेता एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष उधोराम वर्मा ने सरकार से अतिरिक्त सत्यापन तत्काल रोकने, समितियों में खरीदी की लिमिट बढ़ाने और आवश्यकता पड़ने पर खरीदी की अवधि बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बार-बार की जांच किसानों के सम्मान के खिलाफ है।
विरोध में नेतराम वर्मा, हेमंत सिंह ठाकुर, विवेक सिंह ठाकुर, घनश्याम वर्मा, भीम पटेल सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे।



