
MRP से तीन गुना महंगे दामों पर बेचे उपकरण
रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में सामने आए करीब 500 करोड़ रुपये के रीएजेंट खरीदी घोटाले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। दो दिन पहले इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दुर्ग स्थित मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया था। अब इसी केस में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
EOW द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अभिषेक कौशल (डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स, पंचकुला), राकेश जैन (प्रोप्राइटर, शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर) और प्रिंस जैन (लाइजनर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स, पंचकुला) शामिल हैं। तीनों आरोपियों को 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
जांच में सामने आया है कि राज्य की जनता को निःशुल्क जांच सुविधा देने के लिए शुरू की गई ‘हमर लैब योजना’ के तहत मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि मोक्षित कॉरपोरेशन ने पूल टेंडरिंग के जरिए ठेका हासिल किया, जिसमें अन्य फर्मों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा में भाग लेकर सहयोग किया।
जांच एजेंसियों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में कार्टलाइजेशन किया गया। तीनों फर्मों के टेंडर दस्तावेजों में उत्पादों का विवरण, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स एक ही पैटर्न में भरे गए। यहां तक कि जिन उत्पादों का नाम निविदा में स्पष्ट नहीं था, उन्हें भी समान रूप से दर्शाया गया। दरें भी एक जैसे क्रम में कोट की गईं।
आरोप है कि इसके बाद मोक्षित कॉरपोरेशन ने CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर सामग्री की आपूर्ति कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया, जिससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।



