भारतमाला मुआवजा घोटाला: दो तहसीलदार 10 दिन की रिमांड पर, विशेष अदालत ने 20 फरवरी तक ACB-EOW को सौंपी पूछताछ की जिम्मेदारी

रायपुर। अभनपुर भारतमाला मुआवजा घोटाले में गिरफ्तार डिप्टी कलेक्टर एवं अभनपुर के तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे तथा गोबरा नवापारा के तत्कालीन नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने बुधवार को विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने दोनों आरोपियों को 20 फरवरी तक 10 दिन की पुलिस रिमांड पर ACB‑EOW को सौंप दिया है। अब जांच एजेंसी दोनों से विस्तृत पूछताछ करेगी।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, दोनों लोकसेवकों पर पद का दुरुपयोग कर फर्जी मुआवजा पत्रक तैयार करने और शासन को लगभग 43 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का गंभीर आरोप है। मामला दर्ज होने के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। लगातार निगरानी और तलाश के बाद 11 फरवरी को विशेष टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया।
इस प्रकरण में अपर कलेक्टर निर्भय साहू भी आरोपी हैं, हालांकि वे फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। ईओडब्ल्यू की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471, 420, 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7सी एवं 12 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
जांच में सामने आया है कि रायपुर–विशाखापट्टनम और दुर्ग बायपास भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण हेतु किए गए भूमि अधिग्रहण में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ पटवारियों, राजस्व निरीक्षकों, भूमाफियाओं और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर कूटरचित राजस्व अभिलेख तैयार कर प्रभावित भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि दिलाई।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपियों की उच्चतम न्यायालय में दायर जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। इससे पूर्व विशेष न्यायालय द्वारा इनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी की जा चुकी थी। साथ ही आरोपियों की संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी विशेष न्यायालय रायपुर में विचाराधीन है।इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी कथित मनी-ट्रेल और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहा है। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान अन्य लोकसेवकों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी उजागर हो सकती है। फिलहाल ईओडब्ल्यू पूरे नेटवर्क और वित्तीय प्रवाह की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।




