आबकारी भवन के तीसरे माले में आधी रात आग, ऑडिट से पहले फाइलें जलने की आशंका

रायपुर। राजधानी रायपुर के लाभांडी स्थित आबकारी भवन में शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात उस समय हड़कंप मच गया, जब भवन की तीसरी मंज़िल पर स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के कार्यालय में आग लग गई। यह वही कार्यालय है, जहाँ सरकारी शराब की खरीदी-बिक्री से जुड़े अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड रखे जाते हैं।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग रात करीब 9 बजे के आसपास लगी और उसे पूरी तरह बुझाने में आधी रात तक का समय लगा। दूसरे और तीसरे माले की बाहरी दीवारों पर आग के काले निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि आग काफी देर तक धधकती रही, बावजूद इसके विभागीय स्तर पर आधिकारिक सूचना देने में देर हुई।
ऑडिट से पहले आग, रिकॉर्ड को लेकर सवाल
सूत्रों के अनुसार, सोमवार से विभाग का ऑडिट शुरू होना था, और इसी कार्यालय में वित्तीय वर्ष की बिक्री से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें रखी थीं। आग की घटना के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कई अहम रिकॉर्ड जलकर नष्ट हो गए हैं। इस घटना से न केवल आबकारी अमला, बल्कि संबंधित जांच एजेंसियां भी असमंजस में हैं कि अब ऑडिट किस आधार पर किया जाएगा।
पुलिस को सूचना नहीं, विभागीय चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि आग की सूचना पुलिस को औपचारिक रूप से नहीं दी गई, ऐसा अधिकारियों का कहना है। वहीं, आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले पर फिलहाल खामोशी साधे हुए हैं, जिससे घटना को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है।सरकार का आधिकारिक बयानसरकार की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि “दिनांक 07/02/2026 को शाम लगभग 8:30 बजे लाभांडी स्थित आबकारी भवन में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड के कार्यालय के तृतीय तल के एक कक्ष में बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगी। इस घटना में कार्यालय में रखे कंप्यूटर, प्रिंटर एवं यूपीएस जल गए। अवलोकन में दस्तावेजों को कोई नुकसान नहीं पाया गया है। सभी फाइलें लोहे की आलमारियों में सुरक्षित थीं।”
बयान में यह भी कहा गया कि ड्यूटी पर तैनात गार्ड ने समय रहते जलने की गंध महसूस कर स्टाफ को सूचना दी, जिसके बाद भवन में उपलब्ध अग्निरोधक उपकरणों से आग पर तुरंत काबू पा लिया गया। 8 फरवरी की सुबह पुनः निरीक्षण में भी किसी आवश्यक दस्तावेज के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
विवाद की स्थिति: हालांकि, स्थानीय लोगों के दावों और विभागीय बयान में स्पष्ट विरोधाभास दिख रहा है। एक ओर रिकॉर्ड जलने की आशंका जताई जा रही है, वहीं सरकार इसे केवल तकनीकी उपकरणों तक सीमित नुकसान बता रही है। ऐसे में आग की वास्तविक वजह और नुकसान की सीमा को लेकर सवाल बने हुए हैं।



