मंत्री टंकराम वर्मा ने गिनाईं राजस्व विभाग की दो साल की उपलब्धियां, बोले – डिजिटल से ग्राउंड तक बदला सिस्टम

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व विभाग ने बीते दो वर्षों में प्रशासनिक सुधार, भूमि प्रबंधन और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के मुताबिक विभाग आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से आम नागरिकों को त्वरित और सरल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि राज्य में जियो-रेफरेंसिंग, फार्मर रजिस्ट्रेशन और डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) की शुरुआत की गई है। इसके तहत पटवारी नक्शों के जियो-रेफरेंसिंग के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे भू-अभिलेखों की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ी है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में भूमि सर्वेक्षण और नक्शा कार्यक्रम के जरिए छोटे भू-खंडों को भी रिकॉर्ड में शामिल किया जा रहा है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में DGPS और आधुनिक सर्वे तकनीकों से सर्वे-रीसर्वे का कार्य तेज किया गया है। भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को ऑनलाइन और सरल बनाते हुए ऑटो डाइवर्जन सिस्टम लागू किया गया है। इसके साथ ही, स्व-नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होने से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है।
राज्य में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए नए तहसील और उप-तहसील कार्यालयों की स्थापना की गई है। राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने हेतु अतिरिक्त न्यायालयों और नए पदों का सृजन किया गया है। भू-अभिलेखों को सिविल न्यायालयों से लिंक कर ऑनलाइन प्रक्रिया को मजबूत किया गया है।।
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य और राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, अधोसंरचना विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
कुल मिलाकर, राजस्व विभाग की ये उपलब्धियां सुशासन, पारदर्शिता और जनहित को केंद्र में रखकर किए गए सुधारों का स्पष्ट प्रमाण हैं, जो आने वाले समय में राज्य के विकास को नई गति देंगी।
मैनपॉवर की समस्या
राजस्व विभाग में मैदानी अमले की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। राजस्व निरीक्षक के 1090 स्वीकृत पदों में से 393 पद खाली हैं, जबकि पटवारियों के 5792 स्वीकृत पदों में से 911 पद रिक्त पड़े हैं। यही नहीं, जिला प्रशासन के अंतर्गत लिपिकीय और चतुर्थ श्रेणी के कुल 6752 पदों में से 2881 पद अब भी भरे नहीं जा सके हैं। इन रिक्तियों के चलते सीमित कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है, जिससे कार्य निष्पादन की गति प्रभावित हो रही है।
दूसरी बड़ी समस्या राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की बढ़ती संख्या है। पीठासीन अधिकारी, प्रोटोकॉल अधिकारी और कार्यपालिक दंडाधिकारी जैसे अधिकारियों की कमी, साथ ही निर्वाचन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में अधिकारियों की तैनाती के कारण राजस्व मामलों का समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है। संसाधनों की कमी भी इस स्थिति को और जटिल बना रही है। मंत्री टंकराम वर्मा ने आश्वस्त किया कि जल्द ही विभाग में भर्ती कर समस्या दूर की जाएगी।



