
महासमुंद में प्रेसवार्ता, मनरेगा कानून में बदलाव को बताया श्रमिक-विरोधी
रायपुर। राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाव संग्राम के तहत छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने महासमुंद जिला कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा और मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को समाप्त कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के फैसलों से मजदूरों से उनका संवैधानिक काम का अधिकार छीना जा रहा है।
डॉ. महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की डबल इंजन सरकार ने पिछले दो वर्षों में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लिया है। राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर है, विकास कार्य ठप पड़े हैं और कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में 125 दिनों की मजदूरी देने का दावा सिर्फ एक राजनीतिक जुमला है।
मनरेगा में बदलाव श्रमिक-विरोधी और गांधीजी के आदर्शों पर प्रहार
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा कानून में किया गया बदलाव श्रमिक-विरोधी कदम है और यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की सोच पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘सुधार’ के नाम पर लोकसभा में एक और विधेयक पारित कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को कमजोर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़े अधिकारों पर आधारित गारंटी थी, लेकिन नया फ्रेमवर्क इसे केंद्र नियंत्रित, सशर्त योजना में बदल देता है।राज्यों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ, मनरेगा के बंद होने का खतराडॉ. महंत ने कहा कि पहले मनरेगा में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब इसे 60:40 के अनुपात में लागू किया जा रहा है। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा राशि जारी करने से पहले राज्यों को 50 प्रतिशत मैचिंग ग्रांट जमा करनी होगी, जबकि अधिकांश राज्यों की वित्तीय स्थिति कमजोर है। इससे आने वाले समय में मनरेगा योजना धीरे-धीरे बंद होने का खतरा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों पर ‘V.B.G. RAM.G.’ के नाम पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है।125 दिन की मजदूरी का दावा छलावानेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 100 दिन से 125 दिन की मजदूरी की बात सिर्फ एक चालाकी है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के लगभग 70 प्रतिशत गांवों में अघोषित रूप से मनरेगा कार्य बंद हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का रोजगार ही उपलब्ध कराया गया है, यानी किसी भी वर्ष 100 दिन का रोजगार नहीं दिया गया।
गरीबों के खिलाफ है यह बिलडॉ. महंत ने कहा कि मनरेगा योजना कोरोना जैसी आपदा के समय गरीबों के लिए जीवनरेखा साबित हुई थी। इसे अधिकार से योजना में बदलना मजदूरों को सरकार की कृपा पर निर्भर बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम के नाम पर फिर से जनता को भ्रमित कर रही है और V.B.G. RAM.G. में भगवान राम से कोई संबंध नहीं है।



