
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासत अचानक तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर सवाल उठाते हुए बड़ा बयान दिया। बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पूछा क्या मोहन भागवत ने कभी वंदे मातरम गाया है? क्या किसी संघी को वंदेमातरम गाना आता ही है?”उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम् का गायन कांग्रेस के अधिवेशन से शुरू हुआ था और जिन लोगों ने कभी तिरंगा नहीं फहराया, वे आज राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं। बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि “जो अंग्रेजों के साथ चले, वे आज देशभक्ति का प्रमाण पत्र बांट रहे हैं।”बघेल के इस तीखे हमले के बाद प्रदेश में राजनीतिक तापमान और बढ़ गया, क्योंकि आज ही राज्य के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने खुलकर पलटवार किया।
उन्होंने कहा आपातकाल और सिख दंगों की तरह कांग्रेस को राष्ट्रगीत को खंडित करने पर भी आगे चलकर माफी मांगनी पड़ेगी। जायसवाल ने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग और जिन्ना के प्रभाव में कांग्रेस ने ही वंदे मातरम् को खंडित किया, और बाद में 1950 में उसी खंडित संस्करण को राष्ट्रगीत घोषित किया गया।मंत्री जायसवाल ने भूपेश बघेल की चुनौती पर भी जवाब देते हुए कहा “मोहन भागवत से वंदे मातरम् सुनना हो तो उनसे निवेदन करें भूपेश। उनके पास जाएं, तब तो सुन पाएंगे गाना।”उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि यदि भूपेश बघेल संघ गीत ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ गाने लगे हैं, तो यह स्वागतयोग्य है।
जायसवाल ने पूछा कि जिस तरह बघेल यह बताते हैं कि वंदे मातरम् का गायन कांग्रेस ने शुरू किया, “वह यह क्यों नहीं बताते कि इसके टुकड़े भी कांग्रेस ने ही किए?”उन्होंने कहा कि यह विषय सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि राष्ट्रभावना का है, और कांग्रेस को इसके लिए भविष्य में माफी मांगनी पड़ सकती है। यह अलग बात कि तब माफी मांगने लायक बचेगी भी या नहीं। ‘वंदे मातरम्’ पर छिड़ी यह बहस अब छत्तीसगढ़ में एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है, जिसके जल्द थमने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे।




