छत्तीसगढ़: नगरीय निकायों में संपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी

रायपुर– प्रदेश के नगरीय निकायों में जल्द ही संपत्ति कर (Property Tax) बढ़ सकता है। नगरीय प्रशासन विभाग इस दिशा में तैयारी कर रहा है। गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संपत्ति कर प्रणाली को वर्तमान समय के अनुरूप बनाया जाए। बैठक में राज्य के सभी महापौर, आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारी शामिल हुए। चर्चा का मुख्य फोकस था – नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना। विभाग का तर्क है कि संपत्ति के वर्तमान मूल्य के हिसाब से ही कर और किराया तय होना चाहिए, ताकि स्थानीय निकायों की आमदनी बढ़ सके और वे अनुदान पर निर्भर न रहें।
नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि बढ़े हुए राजस्व का सीधा उपयोग जन सुविधाओं और नागरिक सेवाओं के विस्तार में किया जाएगा। उनका कहना था कि मजबूत वित्तीय ढांचे के बिना नगरीय निकाय शहरों की बदलती जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि संपत्ति कर प्रणाली में इससे पहले 2016 में बदलाव किया गया था। अब करीब नौ साल बाद एक बार फिर सुधार की तैयारी हो रही है। विभाग का मानना है कि मौजूदा ढांचा समय के साथ अप्रासंगिक हो चुका है और अब नए स्वरूप की आवश्यकता है।
बैठक में अधिकारियों ने सुझाव दिया कि कर वृद्धि को संतुलित और न्यायोचित बनाया जाए, ताकि नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और निकायों की आय भी बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सुधार लागू होता है तो प्रदेश के नगरीय निकायों को अधिक संसाधन मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर व सेवाओं में सुधार देखने को मिलेगा।
जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही साय सरकार
नगरीय निकायों में संपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी पर अब राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है और कहा है कि साय सरकार जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाल रही है। कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में पहले ही बिजली बिल बढ़ाए गए हैं और हाफ बिजली बिल योजना को सीमित कर दिया गया है। अब संपत्ति कर में बढ़ोतरी की तैयारी कर जनता की जेब पर सीधा असर डाला जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि वर्तमान सरकार में नगरीय निकायों में किसी भी तरह का ठोस विकास कार्य नहीं हो रहा है। बावजूद इसके, नागरिकों पर कर का बोझ डालना गलत है।




