महाराष्ट्र से 400 किमी उड़कर छत्तीसगढ़ पहुँचा बीमार गिद्ध वाइट रंप्ड वल्चर

उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन विभाग की सतर्कता से सफल रेस्क्यू
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां पहुंचे एक बीमार गिद्ध को वन विभाग की टीम ने समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। यह सफलता न केवल वन विभाग की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि अंतरराज्यीय वन्यजीव संरक्षण नेटवर्क की मजबूती को भी रेखांकित करती है।
नियमित पेट्रोलिंग के दौरान दिखा बीमार गिद्ध
यह घटना इन्दागांव बफर परिक्षेत्र के काण्डसर बीट की है, जहां सुबह करीब 11 बजे नियमित फुट पेट्रोलिंग के दौरान पेट्रोलिंग श्रमिक राधेश्याम यादव की नजर एक गिद्ध पर पड़ी। गिद्ध उड़ने में असमर्थ था और गर्दन झुकाकर जमीन पर बैठा हुआ दिखाई दिया। स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल परिक्षेत्र अधिकारी को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
GPS ट्रांसमीटर से खुला रहस्य


रेस्क्यू के दौरान जांच में सामने आया कि यह वाइट रंप्ड वल्चर (White Rumped Vulture) है, जिसकी पीठ पर माइक्रो ट्रांसमीटर और GPS डिवाइस लगा हुआ था। डिवाइस से प्राप्त जानकारी से स्पष्ट हुआ कि यह गिद्ध महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व से उड़ान भरकर छत्तीसगढ़ पहुंचा था। प्रारंभिक जांच में उसकी खराब तबीयत का कारण डी-हाइड्रेशन या बीमारी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में रेस्क्यू
बिलासपुर के वल्चर विशेषज्ञ अभिजीत शर्मा ने टेलीफोनिक कांफ्रेंसिंग के जरिए रेस्क्यू टीम को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया। मौके पर गिद्ध को पानी और आर्टिफिशियल फीड उपलब्ध कराई गई, जिसके बाद उसे सुरक्षित रूप से जंगल क्षेत्र से बाहर लाया गया और गरियाबंद पहुंचाया गया।
जंगल सफारी में होगा उपचार

इसके बाद जंगल सफारी नया रायपुर की डॉक्टर टीम गरियाबंद पहुंची, जहां गिद्ध को रेस्क्यू केज में शिफ्ट किया गया। गिद्ध को अब उपचार के लिए नया रायपुर ले जाया जा रहा है। उपचार पूर्ण होने के बाद उसे पुनः उसके प्राकृतिक रहवास में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।
समझिए इस रेस्क्यू का महत्व
यह रेस्क्यू क्यों अहम है? – वाइट रंप्ड वल्चर विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल है। समय पर इलाज न मिलने पर इसका जीवन संकट में पड़ सकता था।
GPS ट्रैकिंग से क्या फायदा हुआ? – GPS के जरिए गिद्ध की उड़ान, मूवमेंट और स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है, जिससे संरक्षण रणनीति मजबूत होती है।
उदंती–सीतानदी क्यों खास है? – यह टाइगर रिज़र्व लगभग 70% पहाड़ी और घने वन क्षेत्र से आच्छादित है, जहां पहले भी गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है।
वन विभाग की सतर्कता की मिसाल
यह पूरा रेस्क्यू अभियान वन मंत्री केदार कश्यप, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण पाण्डेय तथा उदंती – सीतानदी टाइगर रिज़र्व प्रबंधन के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह अभियान वन्यजीव संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।




