
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। इस बयान के खिलाफ सोशल मीडिया पर विरोध तेज होता जा रहा है।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #भूपेश_बघेल_माफी_मांगो हैशटैग देशभर में दूसरे नंबर पर ट्रेंड करता रहा। सोशल मीडिया पर चल रहे इस ट्रेंड के माध्यम से छत्तीसगढ़ राष्ट्रवादी संघ, भाजपा समर्थकों, साहू समाज के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने भूपेश बघेल से सार्वजनिक माफी की मांग की है। ट्रेंड में प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता देखने को मिली।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव के खिलाफ प्रयुक्त की गई भाषा को साहू समाज ने अपने समाज के सम्मान से जोड़ते हुए कड़ा ऐतराज जताया है। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती।
देशभर से उठा विरोध
जानकारी के मुताबिक, #भूपेश_बघेल_माफी_मांगो हैशटैग ने पूरे देश में ट्रेंड करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तरप्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में रहने वाले साहू समाज के लोगों और राष्ट्रवादी संगठनों ने भी भूपेश बघेल की टिप्पणी पर नाराजगी जताई है।
सोशल मीडिया पोस्ट्स में भूपेश बघेल की भाषा को अशोभनीय, असंवैधानिक और समाज को ठेस पहुंचाने वाली बताया गया। कई यूज़र्स ने लिखा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी है।
साहू समाज का अल्टीमेटम: मामले को लेकर साहू समाज पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर भूपेश बघेल सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
इसके तहत समाज द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन भी सौंपा गया है। समाज ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई राजनीतिक नहीं, बल्कि सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ी हुई है।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज: भूपेश बघेल के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी और तेज हो गई है। भाजपा समर्थकों और राष्ट्रवादी संगठनों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और भूपेश बघेल से माफी मंगवानी चाहिए।




