छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश: 7 से 20 साल तक सजा का प्रावधान, आज ही पारित होने की संभावना

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने बहुप्रतीक्षित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पेश कर दिया। विधेयक पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस पर चर्चा तेज हो गई है। सदन में सरकार के बहुमत को देखते हुए इसके आज ही पारित होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में पहले ही संकेत दे दिए थे कि यह विधेयक आज प्रस्तुत किया जाएगा। इससे पहले राज्य कैबिनेट ने भी इस विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी थी, जिससे इसके इसी सत्र में पेश होने और पारित होने का रास्ता साफ हो गया था।
धर्मांतरण की स्पष्ट परिभाषा और सख्त प्रावधान
विधेयक में धर्मांतरण की स्पष्ट परिभाषा दी गई है और अवैध तरीकों से धर्म परिवर्तन कराने पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण कराना पूर्णतः प्रतिबंधित होगा।सरकार का कहना है कि यह कानून धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी बनाएगा, ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके।
धर्म परिवर्तन के लिए अनिवार्य सूचना प्रक्रिया: यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा।
– प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी- 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान रहेगा।
कठोर दंड का प्रावधान: विधेयक में अवैध धर्मांतरण के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है:-
सामान्य मामलों में: 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना
– संवेदनशील वर्ग (महिला, नाबालिग, SC/ST/OBC) के मामलों में: 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना
– सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में: 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना।
विशेष न्यायालय में सुनवाई: विधेयक के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
कुछ महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण- प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है
– पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि अवैध और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाना है, ताकि प्रत्येक नागरिक अपनी आस्था के अनुसार स्वतंत्र रूप से जीवन जी सके। यह विधेयक राज्य की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है, जिस पर आने वाले दिनों में व्यापक चर्चा की संभावना है।




