NMDC की पहल: बस्तर के दुर्गम गांवों में मुफ्त एम्बुलेंस सेवा शुरू, 16 किमी पैदल चलने से मिलेगी राहत

दंतेवाड़ा। बस्तर के दुर्गम वनांचलों में रहने वाले ग्रामीणों को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने के लिए एनएमडीसी लिमिटेड ने निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा शुरू की है। इस पहल से डिपॉजिट-13 परियोजना क्षेत्र और आसपास के दूरस्थ गांवों के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। अब तक कुछ बस्तियों के लोगों को अस्पताल पहुंचने के लिए करीब 16 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। नई सुविधा से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
23 अक्टूबर से शुरू हुई एम्बुलेंस सेवा
23 अक्टूबर को शुरू की गई यह एम्बुलेंस लोहागांव जंक्शन से संचालित होती है। इसके माध्यम से लोहागांव, अंद्रि, गम्फुर, डोडी टिम्मेनार, पुरंगेल, करका और तंबोडी सहित आसपास के दुर्गम गांवों के निवासियों को निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
डिपॉजिट-13 परियोजना का विकास एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सीएमडीसी) के संयुक्त उपक्रम एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) द्वारा किया जा रहा है। एम्बुलेंस में स्ट्रेचर की सुविधा है। इसके संचालन के लिए चालक तैनात है और एनएमडीसी के कर्मचारी भी सहयोग करते हैं।

16 किलोमीटर पैदल चलने की परेशानी होगी कम
दुर्गम पहाड़ी रास्तों और स्वास्थ्य केंद्रों से दूरी के कारण क्षेत्र के ग्रामीणों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ता रहा है। परियोजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, कुछ बस्तियों के लोगों को अस्पताल पहुंचने के लिए लगभग 16 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। इस दूरी को तय करने में पांच से छह घंटे तक लग सकते थे।
प्रसव, दुर्घटना या अचानक तबीयत बिगड़ने जैसी परिस्थितियों में इतनी लंबी दूरी तय करना मरीजों और उनके परिजनों के लिए बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे में निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा से जरूरतमंद ग्रामीणों को अस्पताल तक पहुंचने का एक व्यावहारिक विकल्प मिलेगा।
एम्बुलेंस सेवा के लिए संपर्क नंबर: 9479156726, 8763222004
‘हॉस्पिटल ऑन द व्हील्स’ से भी मिल रही चिकित्सा सुविधा
एनएमडीसी द्वारा वित्तपोषित ‘हॉस्पिटल ऑन द व्हील्स’ मोबाइल चिकित्सा पहल के तहत प्रत्येक रविवार को चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते हैं। इस पहल के माध्यम से दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य जांच और बुनियादी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
किरंदुल अस्पताल से जुड़े और मोबाइल चिकित्सा सेवा का संचालन करने वाले डॉ. एम.वी. लाल, सीएमओ-एनएमडीसी के अनुसार, मोबाइल चिकित्सा वाहन में ईसीजी मशीन और मधुमेह के मरीजों के लिए बुनियादी दवाएं उपलब्ध हैं। टीम शुरुआती चिकित्सा सहायता देती है। जिन मरीजों को आगे की जांच या विशेष उपचार की जरूरत होती है, उन्हें किरंदुल अस्पताल भेजा जाता है।
मोबाइल चिकित्सा सेवा जहां गांवों तक बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाती है, वहीं नई एम्बुलेंस जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में सहायता करेगी।

लोहागांव से किरंदुल बाजार तक बस सेवा
ग्रामीणों की आवाजाही आसान बनाने के लिए लोहागांव तिराहे से किरंदुल बाजार के बीच बस सेवा भी शुरू की गई है। लगभग नौ किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह बस प्रतिदिन तीन बार संचालित होती है। बस के निर्धारित समय सुबह 10 बजे, दोपहर 12:30 बजे और दोपहर 1:30 बजे हैं।
इससे ग्रामीणों को बाजार और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए परिवहन का साधन मिला है। जंगल से लकड़ी, सब्जियां और फल जैसी उपज लेकर आने-जाने वाले लोगों को भी इससे सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सात किलोमीटर सड़क से करीब 300 ग्रामीणों को लाभ
लोहागांव तिराहे से लोहागांव गांव को जोड़ने वाली सात किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके आने वाले महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। सड़क बनने से दुर्गम क्षेत्र के लगभग 300 ग्रामीणों को लाभ मिलने की संभावना है।
सड़क, बस और एम्बुलेंस जैसी सुविधाओं के विस्तार से दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों के लिए अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। एनएमडीसी की यह पहल दुर्गम वनांचलों में भौगोलिक दूरी के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



