बजट 2026-27 की तैयारी शुरू: विभागवार बैठकों का सिलसिला आज से, वित्त मंत्री OP चौधरी ने संभाली कमान

श्रम एवं उद्योग विभाग की चर्चा से बैठकों का आगाज़
रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026-27 के बजट की औपचारिक तैयारी आज से शुरू हो गई है। बजट निर्माण की दिशा तय करने के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने मंत्रालय में विभागवार मंत्रियों के साथ चर्चा का दौर प्रारंभ कर दिया है।
बजट बैठकों के पहले दिन वित्त मंत्री OP चौधरी चार मंत्रियों के साथ उनके विभागों की योजनाओं, प्राथमिकताओं और आगामी वित्तीय जरूरतों पर विस्तार से मंथन करेंगे। इस क्रम में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और मंत्री गुरु खुशवंत के साथ अलग-अलग सत्रों में चर्चा की जाएगी।
जानकारी के अनुसार इन बैठकों में चल रही योजनाओं की प्रगति, नई योजनाओं के प्रस्ताव, बजट आवंटन, और जनहित से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर फोकस किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट तैयार करना है, जो रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यटन विकास और श्रमिक कल्याण को नई दिशा दे सके।वित्त विभाग का मानना है कि विभागवार संवाद से बजट को व्यावहारिक, संतुलित और विकासोन्मुख बनाया जा सकेगा। आने वाले दिनों में अन्य विभागों के मंत्रियों के साथ भी इसी तरह की बैठकें प्रस्तावित हैं।
श्रम एवं उद्योग विभाग की चर्चा से बैठकों का आगाज़

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारियों का औपचारिक आगाज़ हो गया है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज मंत्रालय में श्रम एवं उद्योग विभाग से जुड़ी योजनाओं और प्रस्तावों पर चर्चा के साथ विभागवार बैठकों की शुरुआत की।
बैठक में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन शामिल हुए, जहां श्रमिक कल्याण, रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास, कौशल उन्नयन और श्रम कानूनों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया। वित्त मंत्री ने विभाग की वर्तमान योजनाओं की प्रगति, बजट आवश्यकताओं और आगामी वित्तीय वर्ष की प्राथमिकताओं की जानकारी ली।
सूत्रों के अनुसार सरकार का फोकस रोजगार बढ़ाने, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने और उद्योगों के अनुकूल वातावरण तैयार करने पर रहेगा। इसके लिए नई योजनाओं और मौजूदा कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।
बजट बैठकों के इसी क्रम में आज अन्य विभागों के मंत्रियों के साथ भी अलग-अलग सत्रों में चर्चा होगी। वित्त मंत्री OP चौधरी विभागवार संवाद के जरिए व्यावहारिक और विकासोन्मुख बजट तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



