Raipur: सांड ने मचाया आतंक, कांग्रेस नेता समेत 15 घायल; गोद में बच्चा लेकर जा रहे बुजुर्ग को पटका

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़कों और हाईवे पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। शहरों की सड़कों से लेकर ग्रामीण इलाकों के प्रमुख मार्गों तक सड़क पर बैठे और विचरण करते मवेशियों के चलते वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है। हाल ही में दीनदयाल उपाध्याय नगर, सेक्टर-2 में सांड के हमले में एक व्यक्ति और उसका 11 माह का मासूम बच्चा घायल होने का मामला सामने आया है।
घटना के बाद पूर्व विधायक विकास उपाध्याय घायल डीएन शर्मा और उनके बच्चे से मिलने उनके घर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि खुलेआम घूम रहे मवेशियों और बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
हाईवे पर भी पशुओं का जमावड़ा
इसी बीच कवर्धा-बेमेतरा मार्ग पर सड़क के बीच बैठे पशुओं को देखकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों से नाराजगी जताई। कवर्धा जाते समय उन्होंने बेमेतरा टोल प्लाजा के पास अपना वाहन रुकवाया और हाइवे पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को मौके पर पेट्रोलिंग वाहन बुलाने के निर्देश दिए और पशुओं के रेस्क्यू तथा नियमित निरीक्षण की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हाईवे पर नियमित पेट्रोलिंग हो और सड़क पर बैठे या घूम रहे पशुओं को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए।
शहरों में शिकायत, हाईवे पर भी खतरा
एक तरफ शहरों में आवारा मवेशियों को लेकर नागरिक लगातार शिकायतें कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हाईवे पर भी पशुओं की मौजूदगी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रही है। खासकर रात के समय सड़क पर बैठे पशु वाहन चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते, जिससे गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि सड़क सुरक्षा और गौवंश की सुरक्षा के मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सवाल – स्थायी समाधान कब ?
आवारा पशुओं को सड़क से हटाने की कार्रवाई के साथ बड़ा सवाल उनके स्थायी प्रबंधन का है। स्थानीय स्तर पर बार-बार शिकायतों और हादसों के बाद भी यदि पशु फिर सड़कों पर लौट आते हैं, तो केवल अस्थायी रेस्क्यू से समस्या का समाधान मुश्किल है।प्रदेश में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बीच अब नगर निगम, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती है कि सड़क से आवारा पशुओं को हटाने के साथ उनके सुरक्षित और स्थायी प्रबंधन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।




