
दंतेवाड़ा में निःशुल्क दिव्यांग उपकरण वितरण में वर्चुअली शामिल हुए UHM
सीएम साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा भी वर्चुअली जुड़े
दंतेवाड़ा/रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए लोगों के पुनर्वास और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए ‘दिव्यांग सेवा चरण-2’ अभियान का शुभारंभ किया। दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर में अमित शाह वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर के अनेक आदिवासी भाई-बहनों ने अपने हाथ, पैर, आंखों और सुनने की क्षमता खोई है। ऐसे पीड़ितों को चिह्नित कर उन्हें कृत्रिम अंग और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें।
पहले चरण में 3,600 दिव्यांगजन लाभान्वित हुए
गृह मंत्री ने बताया कि जगदलपुर में 5 से 7 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में लगभग 3,600 दिव्यांगजनों को लाभ मिला। इनमें बस्तर क्षेत्र के 1,570 लाभार्थी शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा पिछले पांच दशकों में नक्सलवाद के कारण बस्तर के गरीब आदिवासी परिवारों को पहुंची पीड़ा की गंभीरता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जब निर्दोष नागरिकों को आईईडी विस्फोटों के जरिए राजनीतिक उद्देश्यों के लिए अपंग बनाया गया जो कि मानव अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी उससे प्रभावित लोगों का दर्द समाप्त नहीं हो जाता। उनके घावों पर मरहम लगाने और उन्हें दोबारा आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास जारी रखने होंगे।
कृत्रिम अंग लगने से तीन साल बाद खुद उठाया पानी का गिलास
अमित शाह ने शिविर में लाभान्वित एक व्यक्ति के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि कृत्रिम हाथ लगने के बाद वह तीन साल में पहली बार अपने हाथ से पानी का गिलास उठाकर पी सका। इस अनुभव को याद करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि लाभार्थी की खुशी सुनकर उनके हृदय को जो आनंद मिला, उसे शब्दों में बयान करना संभव नहीं है।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से अपील की कि नक्सल पीड़ितों के पुनर्वास का यह अभियान निरंतर जारी रखा जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि जहां भी संसाधनों की कमी होगी, भारत सरकार छत्तीसगढ़ के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
बस्तर की बदलती तस्वीर का किया उल्लेख
अमित शाह ने बस्तर ओलंपिक का जिक्र करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में कभी अशांति, बंदूक और बारूद का माहौल था, वहां अब खिलाड़ी आगे आ रहे हैं। यह बस्तर में हो रहे बदलाव का संकेत है।उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों के 200 से अधिक कैंपों को शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा सेवा केंद्रों में बदलने की दिशा में काम किया जा रहा है, इन केंद्रों के माध्यम से अधिकारी विकसित बस्तर की नींव मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन देना सरकार का लक्ष्य
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को कृत्रिम अंग, दिव्यांग उपकरण और पुनर्वास की सुविधाएं देकर आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। उन्होंने इस अभियान से जुड़े छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों, सहयोगी संस्थाओं और सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि सरकार बस्तर की तस्वीर बदलने और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।



