छत्तीसगढ़

रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व विधायक अमित जोगी को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले में उन्हें दोषी मानते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें 2007 में ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक हाईकोर्ट ने अब उस राहत को पलट दिया है और उन्हें समर्पण करने का आदेश दिया है।

अमित जोगी का दावा—‘बिना सुनवाई का अवसर दिए दोषी ठहरा दिया’

फैसले के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि“आज उच्च न्यायालय ने बिना सुनवाई का अवसर दिए मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया। जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।”उन्होंने आगे कहा कि अदालत ने उन्हें 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का समय दिया है और उन्हें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा।

अमित जोगी ने लिखा कि वे “पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य” के साथ आगे बढ़ेंगे और “सत्य की जीत” पर भरोसा रखते हैं।

अमित जोगी के “बिना सुनवाई” वाले दावे पर अभी न्यायालय के विस्तृत आदेश की प्रति सामने आने के बाद ही पूरी कानूनी तस्वीर साफ होगी। फिलहाल मीडिया रिपोर्टों में यही सामने आया है कि हाईकोर्ट ने उन्हें सरेंडर का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

4 जून 2003 को NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा भूचाल बनकर उभरा था। हत्या के बाद जांच राज्य पुलिस से हटाकर CBI को सौंपी गई थी।

इस केस में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे। इनमें से2 आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे,28 लोगों को सजा हुई थी,जबकि अमित जोगी को 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

कैसे फिर खुला मामला?

अमित जोगी की बरी होने के खिलाफ रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में इस मामले को फिर से जीवित किया और उसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई का रास्ता साफ हुआ। इसी कड़ी में अब हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।

कौन थे रामावतार जग्गी?

रामावतार जग्गी कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाले प्रभावशाली नेता थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे।जब विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में गए, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।

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CG Bulletin Desk1

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