Big Naxal Surrender: बीजापुर में 52 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। 54 नक्सलियों ने एक साथ हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया। यह सरेंडर जिला पुलिस अधीक्षक (SP) और CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरेंडर करने वाले नक्सली विभिन्न संगठनों और कैडरों से जुड़े थे, जो लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे। लगातार चल रहे सुरक्षा बलों के दबाव, विकास कार्यों की गति और पुनर्वास नीति के सकारात्मक प्रभाव के चलते इन नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सरेंडर नीति का दिखा असर
अधिकारियों ने बताया कि शासन की नई सरेंडर एवं पुनर्वास नीति ने नक्सलियों को हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। आत्मसमर्पण करने वालों को नियमानुसार पुनर्वास सहायता, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि वे सम्मानजनक जीवन की शुरुआत कर सकें।
सुरक्षा बलों की रणनीति सफलबीते कुछ महीनों से बीजापुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा सघन सर्च ऑपरेशन, एरिया डॉमिनेशन और संवाद कार्यक्रम चलाए जा रहे थे। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े विकास कार्यों ने भी स्थानीय स्तर पर भरोसा बढ़ाया है।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि“हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों का शासन स्वागत करता है। जो लोग अब भी भटके हुए हैं, वे हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं। सरकार उनकी सुरक्षा और पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”इस सामूहिक सरेंडर से न केवल बीजापुर बल्कि पूरे बस्तर संभाग में शांति और स्थिरता की उम्मीद को मजबूती मिली है। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में और भी नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं।




