छत्तीसगढ़ के चार बड़े शहरों में बनेंगे दीनदयाल आडिटोरियम, रायपुर जैसा होगा आर्किटेक्चर, दुर्ग और बिलासपुर में टेंडर फाइनल

रायपुर – राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम की तर्ज पर अब दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर में भी भव्य आडिटोरियम बनने जा रहे हैं। चारों आडिटोरियम 750-750 सीटर होंगे और रायपुर जैसे ही बेहतरीन आर्किटेक्चर होगा। खास बात यह है कि ये योजना केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर उतर चुकी हैं।
दुर्ग और बिलासपुर में टेंडर प्रक्रिया
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने दुर्ग में आडिटोरियम निर्माण का टेंडर मंजूर कर लिया है। इसकी लागत लगभग 23 करोड़ (2296 लाख रुपए) होगी और प्राइम लोकेशन पर इसका काम जल्द शुरू होगा।बिलासपुर में 750 सीटर आडिटोरियम के लिए पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति जारी हो चुकी है। इसकी लागत 22 करोड़ 22 लाख रुपए तय हुई है और टेंडर प्रक्रिया जारी है।
जगदलपुर और अंबिकापुर में प्रगति
जगदलपुर में बनने वाले आडिटोरियम के लिए 22 करोड़ 21 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। यह भी रायपुर की तरह 750 सीटर होगा। अंबिकापुर के लिए प्रस्तावित आडिटोरियम की लागत 23 करोड़ 65 लाख रुपए है। वित्त विभाग से स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी कर दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य
PWD विभाग के मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने चारों शहरों में आडिटोरियम निर्माण कार्य को अगले दो साल में हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
रायपुर मॉडल की मिसाल
रायपुर का पं. दीनदयाल आडिटोरियम, पूर्व मंत्री राजेश मूणत की निगरानी में बना था। यह भवन न सिर्फ सुविधाओं और आर्किटेक्चर के मामले में चर्चित रहा बल्कि अब तक शहर का आकर्षण और सेल्फी प्वाइंट भी बना हुआ है।
लोक निर्माण विभाग मंत्री अरुण साव ने कहा
राजधानी रायपुर का पं. दीनदयाल आडिटोरियम छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित है। अब प्रदेश के चार बड़े शहरों में भी वैसे ही भव्य भवन बनेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी आडिटोरियम अगले दो साल में तैयार होने चाहिए। पीडब्ल्यूडी पूरी गति से काम कर रहा है और गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं होगा।
राजधानी रायपुर का पं. दीनदयाल आडिटोरियम छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित है। अब प्रदेश के चार बड़े शहरों में भी वैसे ही भव्य भवन बनेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी आडिटोरियम अगले दो साल में तैयार होने चाहिए। पीडब्ल्यूडी पूरी गति से काम कर रहा है और गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं होगा।


