छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आगाज, सदन ने तीजन बाई को दी श्रद्धांजलि

सीएम साय बोले – छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का अनमोल रत्न खो दिया, आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव रहेंगी प्रेरणा की स्त्रोत

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है और कला जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

WhatsApp Image 2026 09 22 at 9.10.11 PM

सदन में निधन उल्लेख के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके गायन, अभिनय, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली मंच प्रस्तुति ने दुनिया भर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा। जिस समय महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी बेहद सीमित थी, उस दौर में उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देकर अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गईं।

उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित दुनिया के अनेक देशों में अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया, और यह सम्मान पाने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने उल्लेख किया कि राज्योत्सव के दौरान रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम भी जाना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों ने डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला और साधना आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती रहेगी।

अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा की ओर से डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और कला जगत को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

cropped cg bulletin favicon
CG Bulletin Desk1

Show More

Related Articles

Back to top button
Home
Chhattisgarh
Search