छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मामला, वन मंत्री ने कहा- दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और वन्यजीव तस्करी का मामला ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से जोरदार ढंग से उठाया गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार बाघों का शिकार हो रहा है और विभाग गंभीर लापरवाही बरत रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश, विक्रम मंडावी और लखेश्वर बघेल ने भी सरकार को घेरा।
महंत ने कहा कि 30 महीनों में छह बाघों की मौत हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि बाघों के शिकार मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल (आईबी) के जवान का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक सिंडिकेट काम कर रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने पहले ही अलर्ट जारी किया था, इसके बावजूद वन विभाग ने पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाघों की तस्करी हो रही है और कैमरे बंद होने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या और वार्षिक बजट की जानकारी मांगी। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि बस्तर में नक्सल प्रभाव कम होने के बाद वन्यजीव तस्कर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में दो बाघों की खाल के साथ गिरफ्तार आरोपी महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े थे, लेकिन उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।
वन मंत्री का जवाब
वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी को बचाने या नाम छिपाने की कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि 2022 की गणना के अनुसार इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पांच बाघों की पुष्टि हुई है और रिजर्व के संरक्षण पर हर वर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।
मंत्री ने बताया कि मार्च 2026 में दर्ज एक मामले सहित हालिया कार्रवाई में कुल तीन बाघों की खाल, 13 मूंछें, 12 नाखून, चार कैनाइन दांत और अन्य सामग्री बरामद की गई है। अब तक इस पूरे मामले में 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल का सिपाही बियेश्वर गेड़ाम और गोपनीय मुखबिर बाबूराव मडावी भी शामिल हैं। दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है तथा संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है।
मंत्री ने बताया कि वन विभाग ने भारी बारिश और दुर्गम क्षेत्र के बावजूद व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाकर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। जब्त खाल और अन्य वन्यजीव अवशेषों के डीएनए नमूने भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजे गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद बाघों की वास्तविक उम्र और उनके भौगोलिक स्रोत की पुष्टि होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने पर परिक्षेत्र अधिकारी कमल सिंह कश्यप, उपवनक्षेत्रपाल नरहरी सिंह बघेल और वनरक्षक विश्वनाथ मांझी को निलंबित कर दिया गया है।
वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी का गठन किया है और वन्यजीव अपराध रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद बाघों के अवैध शिकार और तस्करी के पांच मामलों में छह बाघों की खाल जब्त की गई है तथा 41 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। सरकार वन्यजीव संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।




