
प्रयागराज मंडल में 7 kWp रूफटॉप सोलर सिस्टम वाला सोलर-असिस्टेड यात्री कोच तैयार, सालाना 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन का अनुमान
नई दिल्ली/प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने हरित और ऊर्जा-कुशल रेल संचालन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में सोलर-असिस्टेड यात्री कोच तैयार किया गया है। इस कोच की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो सूर्य की रोशनी से बिजली बनाकर कोच की बैटरी को चार्ज करने में मदद करेंगे।
रेलवे के मुताबिक, इस पहल से पारंपरिक तरीके से बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम होगी और यात्री कोच में इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा का एक हिस्सा सीधे सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा।
7 किलोवाट का सोलर सिस्टम, सालाना 13,400 यूनिट बिजली

पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक ICF नॉन-एसी कोच की छत पर करीब 7 किलोवाट-पीक (kWp) क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है।इससे हर साल लगभग 13,400 यूनिट (kWh) स्वच्छ बिजली पैदा होने का अनुमान है। रेलवे के अनुसार, इससे एक कोच पर सालाना करीब ₹2.80 लाख की बचत हो सकती है। साथ ही प्रति कोच हर साल लगभग 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।
अभी कैसे बनती है कोच में बिजली?
परंपरागत ICF यात्री कोचों में बिजली उत्पादन के लिए कोच के नीचे लगाए गए एक्सल-चालित अल्टरनेटर का इस्तेमाल होता है। ट्रेन के पहियों और एक्सल की गति से जुड़े बेल्ट सिस्टम के जरिए अल्टरनेटर चलता है और बैटरी बैंक को चार्ज करता है।इसी बिजली का इस्तेमाल कोच में लाइट, पंखे और मोबाइल चार्जिंग जैसी यात्री सुविधाओं के लिए किया जाता है।
इस व्यवस्था की एक सीमा यह है कि बिजली उत्पादन ट्रेन की गति पर निर्भर करता है। इसके अलावा यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने के दौरान ऊर्जा की कुछ हानि भी होती है।
सूरज की रोशनी से सीधे मिलेगी अतिरिक्त ऊर्जा
नए सोलर-असिस्टेड कोच में छत पर लगे फोटोवोल्टिक पैनल सूर्य की रोशनी को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलेंगे। यह बिजली कोच की बैटरी बैंक को चार्ज करने में अतिरिक्त योगदान देगी। इस तरह दिन के समय उपलब्ध सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकेगा और एक्सल-चालित विद्युत उत्पादन प्रणाली पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
सफल रहा पायलट तो दूसरे कोचों में भी होगा विस्तार
फिलहाल इस तकनीक को एक कोच में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया गया है। रेलवे अब इसके प्रदर्शन और ऊर्जा उत्पादन का आकलन करेगा। पायलट परियोजना के परिणाम संतोषजनक रहने पर इस तकनीक को अन्य यात्री कोचों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।
भारतीय रेलवे की यह पहल यात्री कोचों में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ-साथ ऊर्जा की बचत, परिचालन लागत में कमी और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



