छत्तीसगढ़

रायपुर में बनी अत्याधुनिक BSL-3 लैब, संक्रामक रोगों और वैक्सीन रिसर्च को मिलेगी रफ्तार

CM साय ने बताया बड़ी उपलब्धि, कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य से जुड़े अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान और जैव-सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इस प्रयोगशाला से संक्रामक रोगों की पहचान, उनकी रोकथाम, वैक्सीन अनुसंधान और आधुनिक जांच तकनीकों के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

WhatsApp Image 2026 09 22 at 9.10.11 PM

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को राज्य में उच्चस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशाला वैज्ञानिक नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और मानव स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में भी उपयोगी साबित होगी।

जूनोटिक बीमारियों के अध्ययन में मिलेगी मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि BSL-3 प्रयोगशाला से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों यानी जूनोटिक रोगों के अध्ययन और निगरानी को मजबूती मिलेगी। इससे गंभीर संक्रामक रोगों की पहचान, रोग प्रकोप से निपटने की तैयारी और उन्नत नैदानिक क्षमताओं के विकास में सहायता मिल सकती है।

प्रयोगशाला में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित वातावरण उपलब्ध होगा। इससे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन तथा वैक्सीन और उपचार संबंधी अनुसंधान के अवसर मिलेंगे।

28 सितंबर को हुआ था लोकार्पण

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत यह प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इसका लोकार्पण 28 सितंबर को किया गया था।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना की।

‘वन हेल्थ’ की अवधारणा को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संबंधों पर आधारित ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को मजबूत बनाने में यह प्रयोगशाला महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रयोगशाला भविष्य में रोग निगरानी, जैव-सुरक्षा, पशु एवं जूनोटिक रोगों के अध्ययन और महामारी जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक केंद्र के रूप में विकसित होगी। इससे छत्तीसगढ़ में आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का विस्तार होगा और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।

cropped cg bulletin favicon
CG Bulletin Desk1

Show More

Related Articles

Back to top button
Home
Chhattisgarh
Search