छत्तीसगढ़

धान भंडारण को लेकर फैली भ्रांतियों पर सरकार का स्पष्टीकरण, चूहों और कीटों से बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरों को बताया भ्रामक

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में धान भंडारण को लेकर सामने आ रही चर्चाओं और आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भंडारण के दौरान होने वाली सूखत (Shrinkage) और कीटजनित सीमित हानि एक वैज्ञानिक, स्वाभाविक और प्रबंधनीय प्रक्रिया है। सरकार ने साफ किया कि इसे असामान्य या अचानक उत्पन्न संकट के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों के अनुरूप नहीं है।

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सरकार के अनुसार, धान खरीदी के समय उसमें नमी की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक रहती है। जब इस धान को वैज्ञानिक मानकों के अनुसार गोदामों में संग्रहीत किया जाता है, तो समय के साथ नमी धीरे-धीरे कम होती है। इसी प्रक्रिया के कारण धान के वजन में आंशिक गिरावट दर्ज की जाती है, जिसे तकनीकी भाषा में सूखत कहा जाता है। यह कोई नई घटना नहीं है, बल्कि वर्षों से देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में देखी जा रही सामान्य और स्वीकृत प्रक्रिया है।

स्पष्टीकरण में यह भी कहा गया है कि धान भंडारण के दौरान कीटों और चूहों से होने वाला नुकसान सीमित स्तर पर रहता है, जिसे वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था, नियमित निगरानी और कीट नियंत्रण उपायों के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में बड़े पैमाने पर नुकसान की बात करना या इसे गंभीर अनियमितता के रूप में प्रस्तुत करना भ्रम फैलाने वाला है।

सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि सूखत को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह नमी और भौतिक गुणों से जुड़ी प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि, भंडारण प्रणाली को बेहतर बनाकर इसे न्यूनतम स्तर तक सीमित अवश्य किया जाता है। राज्य में धान भंडारण के लिए निर्धारित मानक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है।

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CG Bulletin Desk1

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