छत्तीसगढ़ विधानसभा में नकटी गांव बुलडोजर कार्रवाई पर जोरदार हंगामा, विपक्ष की नारेबाजी; गर्भगृह में पहुंचते ही सदस्य स्वमेव निलंबित

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। कांग्रेस ने इस मामले में स्थगन प्रस्ताव पेश किया और सरकार पर गरीब परिवारों को बेघर करने का आरोप लगाया। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और जमकर नारेबाजी हुई।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने नकटी मामले को लेकर स्थगन प्रस्ताव की सूचना देते हुए कहा कि प्रशासन की कार्रवाई असंवैधानिक और अमानवीय है। कांग्रेस का आरोप था कि मानसून के बीच करीब 85 परिवारों के घर तोड़ दिए गए, जिससे गरीब परिवार बेघर हो गए हैं। विपक्ष ने सरकार से इस पूरे मामले पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की।
बहस के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि एक विधायक के लिए गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया। इस आरोप पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यदि विधायक कॉलोनी के लिए मकान तोड़े जाने का दावा किया जा रहा है तो विपक्ष इसके समर्थन में एक भी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह कार्रवाई पूर्णतः वैधानिक है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए की गई है। उन्होंने बताया कि नकटी में अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसकी जांच अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा की गई। जांच में अवैध कब्जे पाए जाने के बाद वर्ष 2025 में बेदखली का आदेश पारित किया गया था। इसके बाद 28 जून को नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।राजस्व मंत्री ने कहा कि कार्रवाई से पहले कब्जाधारियों को अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करते हुए नवा रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुनर्वास की जिम्मेदारी निभाई है और किसी भी प्रभावित परिवार के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कहना भी सही नहीं है कि कार्रवाई के दौरान क्षेत्र वर्षा से प्रभावित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार की गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया और सदन की कार्यवाही निर्धारित एजेंडे के अनुसार चलाने का निर्णय लिया। साथ ही आसंदी ने विपक्ष को दस्तावेज पटल पर रखने की अनुमति भी नहीं दी।
इसके बाद कांग्रेस विधायक आसंदी के समक्ष गर्भगृह में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे। हंगामे के चलते सदन का माहौल गरमा गया। विधानसभा की परंपरा के अनुसार गर्भगृह में पहुंचते ही विपक्ष के सदस्य स्वमेव निलंबित हो गए।
नकटी गांव की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विधानसभा में हुए इस हंगामे से दिनभर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विपक्ष ने सरकार पर गरीब विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने कार्रवाई को नियमों के तहत बताया और विपक्ष के आरोपों को निराधार करार दिया।




