छत्तीसगढ़ में SAI का रीजनल सेंटर, नेशनल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस सेंटर स्वीकृत करने समेत कई मांग

उप मुख्यमंत्री अरुण साव केंद्रीय खेल मंत्री से की मुलाकात
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास और खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में खेल प्रशिक्षण और अधोसंरचना को सुदृढ़ करने से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया।
उप मुख्यमंत्री साव ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत कुल 23 खेल अधोसंरचनाओं के निर्माण से जुड़े प्रस्ताव मंत्रालय को भेजे गए हैं। उन्होंने इन सभी प्रस्तावों को शीघ्र मंजूरी देने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान श्री साव ने राज्य में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) का क्षेत्रीय केंद्र, नेशनल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (NCOE) प्रारंभ करने, लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना तथा बिलासपुर स्थित खेलो इंडिया एक्सिलेंस सेंटर में दो अतिरिक्त खेलों को शामिल करने की मांग रखी। इसके साथ ही रायपुर में टेनिस के लिए खेलो इंडिया एक्सिलेंस सेंटर को स्वीकृति देने का भी अनुरोध किया गया।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन कोचिंग, खेल विज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण अधोसंरचना के अभाव में खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। राज्य सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि राज्य शासन ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए उच्च स्तरीय एथलीट तैयार करने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है। इन प्रस्तावों के स्वीकृत होने से एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग, क्याकिंग-कैनोइंग, बास्केटबॉल और वॉलीबॉल जैसे खेलों में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण और व्यवस्थित प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।यह मुलाकात छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।




