
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद अब सियासत तेज हो गई है। एक तरफ जहां सरकार राहत और जांच की बात कर रही है, वहीं विपक्ष ने इसे बड़ी लापरवाही बताते हुए कड़ी कार्रवाई और न्यायिक जांच की मांग उठाई है।हादसे में कई मजदूरों की मौत और दर्जनों के घायल होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विष्णुदेव साय ने घटना को दुखद बताते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीएम राहत कोष से मुआवजे की घोषणा की है।
विपक्ष का हमला: जांच टीम गठित, न्यायिक जांच की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने हादसे को लेकर 10 सदस्यीय जांच टीम गठित की है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं सुरक्षा में बड़ी चूक का संकेत हैं। कांग्रेस ने मामले में न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सरकार का जवाब: सख्त कार्रवाई और राहत का भरोसा
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है और मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। फैक्ट्री एक्ट के तहत भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
जवाबी सियासत: कांग्रेस पर भी निशाना: कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए मंत्री देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार ने कोई लापरवाही नहीं की है और विपक्ष हर मुद्दे पर राजनीति करता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में कंपनियों की नियमित जांच व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी, क्योंकि अभी जांच अधिकतर शिकायत या रेंडम आधार पर होती है।
बड़ा सवाल: जिम्मेदारी तय कब?
हादसे के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि हर बार मुआवजे और जांच की घोषणाओं के बाद भी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो पाती। क्या सिर्फ आर्थिक मदद से उन परिवारों का दर्द कम हो पाएगा, जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया? फिलहाल, राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है।




