CG Vidhan Sabha Monsoon Session 2026: बस्तर विश्वविद्यालय में 527 पद खाली, विधानसभा में गूंजा शिक्षकों की कमी का मुद्दा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र में भाजपा विधायक लता उसेंडी ने प्रदेश में संचालित बी.एड.-डी.एड. महाविद्यालयों और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर में रिक्त पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्वीकृत और कार्यरत शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों की जानकारी मांगी, साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन और पूर्व में हुई भर्ती शिकायतों पर सरकार से जवाब तलब किया।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने सदन को बताया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के किसी भी जिले में बी.एड. और डी.एड. महाविद्यालय संचालित नहीं किए जाते। इन संस्थानों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग और एससीईआरटी (SCERT) के माध्यम से किया जाता है।
मंत्री ने बताया कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वर्ग के 265 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 236 पद रिक्त हैं, जबकि गैर-शैक्षणिक वर्ग के 320 स्वीकृत पदों में 291 पद खाली हैं। यानी विश्वविद्यालय में कुल 585 स्वीकृत पदों में से 527 पद रिक्त हैं।उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की छात्र क्षमता 3,300 है, जबकि वर्तमान में 1,898 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यूजीसी के मानकों के अनुसार यहां 223 शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 29 नियमित शिक्षक ही कार्यरत हैं।
भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि पूर्व में शिकायतें प्राप्त हुई थीं, लेकिन जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर 13 फरवरी 2026 को राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने सभी शिकायतों को निराधार मानते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया।लता उसेंडी ने यह भी पूछा कि क्या विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू की गई है। इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू है।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश में 13 ऐसे महाविद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जहां बी.एड. कॉलेज खोले जा सकते हैं। इस संबंध में यूजीसी के अलग-अलग मानकों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने टास्क फोर्स का गठन किया है।वहीं भाजपा विधायक लता उसेंडी ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से रिक्त पड़े शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर जल्द भर्ती करने की मांग की, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।



