
कोरबा/बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शामिल गेवरा मेगा परियोजना में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने अपने मुख्यालय और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में 60 इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया है। यह पहल कार्बन उत्सर्जन कम करने, वायु गुणवत्ता सुधारने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गेवरा परियोजना में अब ईवी ट्रकों के माध्यम से कोयला परिवहन शुरू हो गया है। परियोजना में संचालित कुल परिवहन बेड़े में कम से कम 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया गया है, ताकि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या और बढ़ाई जा सके।

गेवरा परियोजना के खनन प्रबंधक पंकज कुमार राय ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से डीजल की खपत कम होगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि गेवरा जैसी विशाल ओपनकास्ट परियोजना में ईवी ट्रकों का संचालन शुरू होना कोयला उद्योग के लिए ग्रीन माइनिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

SECL की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सतत विकास के विजन के अनुरूप है। कंपनी का उद्देश्य हरित तकनीक को अपनाकर नेट ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में योगदान देना और खनन गतिविधियों को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाना है।
कोयला मंत्रालय के अधीन कार्यरत SECL का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से न केवल परिचालन लागत और ईंधन की खपत में कमी आएगी, बल्कि खनन क्षेत्रों में वायु एवं ध्वनि प्रदूषण भी घटेगा। गेवरा परियोजना में शुरू हुई यह पहल भविष्य में SECL की अन्य परियोजनाओं में भी ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने का आधार बनेगी।




