छत्तीसगढ़

बेमेतरा में बनेगी छत्तीसगढ़ की पहली ओपन जेल, बंदियों के सुधार और पुनर्वास का बनेगी मॉडल

23 करोड़ रूपए स्वीकृत, 200 कैदियों की होगी क्षमता

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में खुली जेल (ओपन जेल) की स्थापना के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल मंत्री विजय शर्मा के अनुमोदन के बाद जारी इस आदेश को राज्य की जेल व्यवस्था में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

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उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विश्वास जताया कि जेल विभाग अपनी मूल अवधारणा के अनुरूप बंदियों के सुधार, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करेगा।

महानिदेशक जेल हिमांशु गुप्ता ने बताया कि बेमेतरा स्थित यह खुली जेल 10.20 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की गई है, जिसकी क्षमता 200 बंदियों की होगी। यहां अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, मनोरंजन तथा जेल एवं सुरक्षा स्टाफ के लिए क्वार्टर और बैरक जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

उन्होंने बताया कि खुली जेल में बंदियों को पारंपरिक जेलों की तरह चारदीवारी में बंद नहीं रखा जाएगा। सीमित निगरानी में उन्हें गौशाला, डेयरी, सब्जी उत्पादन, स्क्रीन प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब निर्माण, फैब्रिकेशन, भवन निर्माण, काष्ठ कला, सिलाई, मुर्गी पालन और कुटीर उद्योग जैसे कार्यों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

प्रारंभिक चरण में ऐसे आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों को यहां रखा जाएगा, जिन्होंने 11 वर्ष या उससे अधिक की सजा उत्तम आचरण के साथ पूरी की हो। बंदियों के चयन का अंतिम निर्णय डीजी जेल की अध्यक्षता वाली समिति करेगी।खुली जेल में बंदियों को दिन के समय जेल परिसर से बाहर जाकर जोखिम रहित उद्योगों और खेतों में काम करने की अनुमति होगी।इसके अलावा बेमेतरा-सिमगा मुख्य मार्ग पर ‘आस्था कैफे’ और ग्रॉसरी शॉप का संचालन भी किया जाएगा। वहीं, जेल परिसर के एंपोरियम में बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री की जाएगी।

बंदियों को मछली पालन, पशुपालन, कुक्कुट पालन, बागवानी, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सिलाई, बुनाई, बुक-बाइंडिंग, प्रिंटिंग और कंप्यूटर संचालन सहित कई व्यवसायिक कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था होगी और रिहाई के बाद इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

यह पहल राज्य में दंड से अधिक सुधार और पुनर्वास की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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CG Bulletin Desk1

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