
नारायणपुर के ओरछा क्षेत्र में जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय वायुसेना का एयर-टू-ग्राउंड फायरिंग रेंज तैयार करने की योजना पर आगे की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में करीब 10 हजार एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। प्रस्तावित फायरिंग रेंज के लिए पहले 1,34,672 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई थी, लेकिन इतनी बड़ी जमीन की उपलब्धता नहीं होने के कारण प्रस्तावित क्षेत्र घटाकर करीब 10 हजार एकड़ किया गया है।
इस परियोजना के लिए अबूझमाड़ के ओरछा तहसील क्षेत्र में जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है। 27 अप्रैल और 2 मई 2026 को प्रस्तावित क्षेत्र का हवाई सर्वे किया गया था। इसके बाद राजस्व, वन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने जमीन की स्थिति और उपलब्धता की जांच की।
46 गांवों की ग्रामसभा में दर्ज हुईं आपत्तियां
प्रस्तावित फायरिंग रेंज से प्रभावित क्षेत्र के 46 गांवों की संयुक्त ग्रामसभा 4 अक्टूबर 2026 को आयोजित की गई थी। इसमें ग्रामीणों ने प्रस्ताव को लेकर आपत्तियां दर्ज कराईं। ग्रामसभा में पारित प्रस्ताव की प्रति जनपद पंचायत ओरछा में भी प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जमीन के सर्वे के बाद अब ग्रामसभा के प्रस्ताव और अनापत्ति प्रमाण-पत्र से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों की आपत्तियों और प्रशासनिक औपचारिकताओं के बीच परियोजना की आगे की दिशा महत्वपूर्ण होगी।
पहले भी जंगल वारफेयर सेंटर बनाने की थी योजना
अबूझमाड़ में सैन्य गतिविधियों से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना पहले भी सामने आ चुकी है। करीब 15 साल पहले यहां जंगल वारफेयर सेंटर स्थापित करने के लिए जमीन तलाशने की पहल हुई थी। उस समय लगभग 25 वर्ग किलोमीटर जमीन की जरूरत बताई गई थी और चिह्नांकन की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी, लेकिन यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
फिलहाल, एयरफोर्स फायरिंग रेंज के लिए करीब 10 हजार एकड़ जमीन की तलाश और संबंधित प्रक्रियाओं पर काम चल रहा है। जमीन की उपलब्धता, ग्रामसभा से जुड़ी औपचारिकताओं और अन्य आवश्यक मंजूरियों के बाद ही परियोजना की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।


एयर-टू-ग्राउंड फायरिंग रेंज क्या होती है?
एयर-टू-ग्राउंड फायरिंग रेंज एक ऐसा निर्धारित और नियंत्रित क्षेत्र होता है, जहां लड़ाकू विमान हवा से जमीन पर स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने का अभ्यास करते हैं। इसका इस्तेमाल वायुसेना के पायलटों को वास्तविक परिस्थितियों के करीब प्रशिक्षण देने, हथियारों की सटीकता परखने और सैन्य अभियानों की तैयारी मजबूत करने के लिए किया जाता है।
1. एयर-टू-ग्राउंड फायरिंग रेंज कैसे काम करती है?
- एयर (Air): आसमान में उड़ने वाला लड़ाकू विमान।
- ग्राउंड (Ground): जमीन पर निर्धारित प्रशिक्षण लक्ष्य।
- फायरिंग रेंज (Firing Range): ऐसा सुरक्षित और नियंत्रित क्षेत्र, जहां तय नियमों के तहत हथियार चलाने का अभ्यास होता है।
इस क्षेत्र में विमान निर्धारित लक्ष्यों पर अभ्यास करते हैं। गतिविधियां तय सुरक्षा नियमों, उड़ान प्रक्रियाओं और प्रतिबंधित क्षेत्र की व्यवस्था के तहत संचालित होती हैं। इसका उद्देश्य पायलटों की सटीकता, निर्णय क्षमता और मिशन की तैयारी बेहतर करना है।ध्यान देने वाली बात यह है कि फायरिंग रेंज का मतलब यह नहीं कि वहां हर समय बमबारी होगी। अभ्यास निर्धारित कार्यक्रमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है।
2. छत्तीसगढ़ में फायरिंग रेंज स्थापित होने के क्या फायदे हो सकते हैं?
1. देश की रक्षा तैयारियों को मजबूती- वायुसेना के पायलटों को एक निर्धारित क्षेत्र में हथियारों के इस्तेमाल और लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने का अभ्यास मिल सकता है। इससे उनकी परिचालन तैयारी बेहतर करने में मदद मिलेगी।
2. स्थानीय रोजगार के अवसर
यदि परियोजना के तहत स्थायी सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और सहायक ढांचा विकसित होता है, तो निर्माण, परिवहन, रखरखाव तथा अन्य सेवाओं में स्थानीय लोगों के लिए काम के अवसर पैदा हो सकते हैं।
3. बुनियादी सुविधाओं के विकास की संभावना
परियोजना के लिए सड़क, संचार और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। यदि इनके विकास से आसपास के गांवों को भी लाभ मिले, तो आवागमन और आवश्यक सेवाओं में सुधार हो सकता है। यह लाभ परियोजना की वास्तविक जरूरतों और सरकारी योजनाओं पर निर्भर करेगा।
देश में कहां-कहां हैं ऐसी सुविधाएं?
1. राजस्थान – पोखरण, जैसलमेरपोखरण फील्ड फायरिंग रेंज भारतीय वायुसेना के प्रमुख सैन्य अभ्यास स्थलों में शामिल है। यहां 27 फरवरी 2026 को ‘वायु शक्ति-2026’ अभ्यास आयोजित किया गया था, जिसमें लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों ने निर्धारित लक्ष्यों पर हमले का प्रदर्शन किया।
2. महाराष्ट्र (अहमदनगर )- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के एयरोनॉटिकल सूचना प्रकाशन में अहमदनगर की VAD 6 रेंज को एयर-टू-ग्राउंड फायरिंग और बमबारी रेंज के रूप में दर्ज किया गया है। इस क्षेत्र की गतिविधियों की सूचना निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी की जाती है।


