सीएम साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत से की सौजन्य भेंट

आगामी मानसून सत्र के सुचारु संचालन एवं विभिन्न संसदीय विषयों पर हुई सार्थक चर्चा
रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर स्थित विधानसभा अध्यक्ष निवास (स्पीकर हाउस) में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत भी उपस्थित रहे। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र की तैयारियों सहित विभिन्न संसदीय विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान आगामी मानसून सत्र के सुचारु, गरिमामय एवं प्रभावी संचालन को लेकर विचार-विमर्श किया गया। लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप सदन की कार्यवाही को अधिक सार्थक, जनोन्मुखी एवं व्यवस्थित बनाए रखने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा को लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच बताते हुए कहा कि सदन के माध्यम से जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा और प्रभावी संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत बनाता है।
बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि विधानसभा की कार्यवाही जनअपेक्षाओं के अनुरूप गरिमापूर्ण वातावरण में संचालित हो तथा विकास, सुशासन और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चा को प्रोत्साहन मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सदैव लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान तथा स्वस्थ संसदीय परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध है।
बैठक के दौरान वर्ष 2026 के उत्कृष्ट विधायक सम्मान के लिए संभावित नामों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस सम्मान के माध्यम से विधानसभा की गरिमा बढ़ाने, संसदीय परंपराओं के निर्वहन तथा जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन में उठाने वाले जनप्रतिनिधियों के योगदान को सम्मानित करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों की रचनात्मक भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जनहित सर्वोपरि रखते हुए विधानसभा की कार्यवाही का सफल संचालन राज्य के समग्र विकास और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी मानसून सत्र जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक विमर्श का प्रभावी मंच बनेगा।
बैठक में विधानसभा की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने, संसदीय मर्यादाओं के संरक्षण तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई। सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न यह बैठक राज्य की स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय गरिमा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।




