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गेवरा खदान में ‘कोल लिफ्टिंग युद्ध’ सुरक्षा को ठेंगा दिखाकर दबंगों की खुलेआम गुंडागर्दी, मारपीट का वीडियो वायरल

कोरबा। एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार SECL की गेवरा परियोजना एक बार फिर वर्चस्व और कोल लिफ्टिंग की जंग का अखाड़ा बन गई है। बीती रात दो निजी कंपनियों के कारिंदों के बीच जमकर मारपीट हुई। चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरी घटना सुरक्षा बलों की मौजूदगी में अंजाम दी गई, जहां एक कंपनी के कथित दबंगों ने दूसरी कंपनी के कर्मचारी को बेरहमी से पीटा।

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इस पूरी वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने खदानों की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बेखौफ ‘बाउंसर’, लहूलुहान कर्मचारी

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार गेवरा खदान में लंबे समय से के.के. एंटरप्राइजेज का दबदबा बताया जाता है। आरोप है कि बीती रात कोयला लिफ्टिंग के दौरान के.के. एंटरप्राइजेज से जुड़े कथित बाउंसरों ने KCPL कंपनी के कर्मचारियों पर हमला बोल दिया।

पहले तीखी नोकझोंक हुई और फिर देखते ही देखते लाठी-डंडों से मारपीट शुरू हो गई। इस हमले में KCPL के कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। खदान परिसर के भीतर हुई इस खुलेआम गुंडागर्दी से अन्य मजदूरों और कर्मचारियों में दहशत का माहौल है।

पाली हत्याकांड की पुनरावृत्ति का डर: स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह घटना पाली क्षेत्र में पिछले वर्ष हुए खूनी टकराव की याद दिलाती है, जिसमें एक ट्रांसपोर्टर की जान चली गई थी।गेवरा की यह घटना पुलिस और प्रशासन के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है। यदि समय रहते इन ‘कोल माफियाओं’ और उनके गुर्गों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो दीपका–गेवरा क्षेत्र में बड़े गैंगवार या जानलेवा हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सत्ता का संरक्षण या प्रशासनिक लापरवाही?

इलाके में चर्चा है कि इन कोल लिफ्टरों को सत्ता के गलियारों में बैठे रसूखदारों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी में भी हमलावर बेखौफ नजर आए।खदान के भीतर घुसकर मारपीट करना और कानून को खुलेआम चुनौती देना इस बात का संकेत है कि इन्हें खाकी या प्रशासन का कोई डर नहीं है। दीपका पुलिस ने मामला दर्ज तो किया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल छोटी धाराओं तक सीमित रहेगी, या फिर सफेदपोश संरक्षकों तक भी जांच पहुंचेगी?

खौफ के साये में अधिकारी और कर्मचारी: इस आपसी टकराव का सीधा असर खदान के सामान्य कामकाज पर भी पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि SECL के अधिकारी और कर्मचारी भी निजी कंपनियों के इस वर्चस्व संघर्ष से असहज हैं।सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद इस तरह की हिंसा परियोजना की साख, श्रमिकों की सुरक्षा और कोयला प्रेषण व्यवस्था—तीनों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।

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CG Bulletin Desk1

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