
रायपुर। देश में सड़क परिवहन की बढ़ती लागत और ट्रक मालिकों पर लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर परिवहन क्षेत्र में एक बार फिर देशव्यापी समान कर व्यवस्था की मांग उठने लगी है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के प्रभारी एवं रायपुर बस्तर कोरापुट परिवहन संघ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह सिद्धू ने केंद्र और राज्य सरकारों से कमर्शियल वाहनों के लिए एक समान रोड टैक्स नीति लागू करने की मांग की है। उन्होंने ‘वन नेशन, वन टैक्स, वन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी’ की दिशा में ठोस पहल करने की आवश्यकता बताई है।
सुखदेव सिंह सिद्धू का कहना है कि देश में अलग-अलग राज्यों की टैक्स नीतियों के कारण ट्रांसपोर्टरों को कई तरह की आर्थिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोड टैक्स, डीजल की कीमतों में अंतर, टोल टैक्स और परिवहन संबंधी शुल्कों का सीधा असर माल ढुलाई की लागत पर पड़ रहा है। इसका अंतिम बोझ आम जनता को महंगी वस्तुओं के रूप में उठाना पड़ता है।
नागालैंड में ट्रकों के पंजीकरण का बढ़ता रुझान बना चर्चा का विषय
सिद्धू ने नागालैंड में भारी कमर्शियल वाहनों के बढ़ते पंजीकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के दूसरे राज्यों में संचालित होने वाले कई ट्रक नागालैंड में पंजीकृत कराए जा रहे हैं। इसके लिए वाहन मालिक एजेंटों की मदद ले रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर दूसरे राज्यों के ट्रक मालिक नागालैंड में पंजीकरण कराने के लिए क्यों आकर्षित हो रहे हैं?
उनके मुताबिक, इसका एक प्रमुख कारण भारी कमर्शियल वाहनों के रोड टैक्स में राज्यों के बीच मौजूद बड़ा अंतर है। विशेष रूप से 16, 18 और 22 चक्का वाले भारी वाहनों के टैक्स में अंतर के कारण ट्रक मालिकों को दूसरे राज्यों में पंजीकरण कराने से आर्थिक बचत दिखाई देती है।
उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अलग-अलग राज्यों की टैक्स नीतियों की समीक्षा करने की मांग की है।
डीजल की कीमतों में अंतर से बढ़ रही परिवहन लागत
ट्रांसपोर्टरों की दूसरी बड़ी समस्या डीजल की कीमतों में राज्यों के बीच अंतर है। सिद्धू ने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ राज्यों में डीजल की कीमत लगभग 96 रुपये प्रति लीटर, जबकि कुछ अन्य राज्यों में 102 से 103 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती है।
कीमतों में 6 से 7 रुपये प्रति लीटर का अंतर लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों के परिचालन खर्च को काफी प्रभावित करता है। यही वजह है कि ट्रक चालक उन राज्यों से डीजल भरवाना पसंद करते हैं, जहां कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं। इससे महंगे डीजल वाले राज्यों में बिक्री और परिवहन लागत दोनों प्रभावित होते हैं।
हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक टोल का बोझ
सिद्धू ने नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स को भी ट्रांसपोर्टरों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बताया। उनका कहना है कि एक ट्रक को महीने में लगभग 50 से 60 हजार रुपये तक टोल टैक्स चुकाना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकारों को रोड टैक्स भी देना पड़ता है।
उन्होंने रोड टैक्स और टोल टैक्स की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। उनका तर्क है कि परिवहन व्यवसाय से जुड़े वाहन मालिकों पर पड़ने वाले इस आर्थिक बोझ को कम करने के लिए व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए।
RTO और परिवहन नाकों पर अनावश्यक रोक-टोक का भी मुद्दा उठाया
परिवहन क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखते हुए सिद्धू ने राज्यों के अलग-अलग परमिट शुल्क, परिवहन नाकों पर अनावश्यक रोक-टोक और कथित अवैध वसूली पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देशभर में ट्रांसपोर्टरों के लिए सरल, पारदर्शी और कम लागत वाली राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति बनाई जानी चाहिए।
आम जनता को भी मिल सकती है महंगाई से राहत
सिद्धू के अनुसार, ट्रांसपोर्टरों पर बढ़ने वाला अतिरिक्त खर्च अंततः माल ढुलाई की लागत में जुड़ता है। इसका असर सीमेंट, लोहा, इस्पात, खाद्यान्न, सब्जियों, किराना और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर पड़ता है।
यदि सड़क परिवहन की लागत कम होती है तो उद्योगों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिल सकता है। इसलिए परिवहन क्षेत्र को राहत देना केवल ट्रक मालिकों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता से जुड़ा विषय है।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
- देशभर में कमर्शियल वाहनों के लिए एक समान और तार्किक रोड टैक्स व्यवस्था।
- भारी वाहनों के पंजीकरण और टैक्स में राज्यों के बीच असमानता दूर करना।
- डीजल पर राज्यवार टैक्स के अंतर को कम करने की पहल।
- टोल टैक्स की दरों और ट्रांसपोर्टरों पर पड़ने वाले मासिक बोझ की समीक्षा।
- रोड टैक्स और टोल टैक्स की व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन।
- RTO और परिवहन नाकों पर कथित अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई।
- ट्रांसपोर्टरों के लिए पारदर्शी और कम लागत वाली राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति।
यह मांग किसी राज्य के विरोध में नहीं, बल्कि देशभर के ट्रांसपोर्टरों को समान अवसर और राहत देने के उद्देश्य से उठाई गई है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ‘ONE NATION – ONE TAX – ONE TRANSPORT POLICY’ की दिशा में ठोस कदम उठाएं। सड़क परिवहन सस्ता होगा, तभी लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और इसका लाभ देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचेगा-सुखदेव सिंह सिद्धू,ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के प्रभारी एवं रायपुर बस्तर कोरापुट परिवहन संघ के अध्यक्ष




