Ground Report: अब रोशनी में नक्सलगढ़ गुंडराजगुड़ेम: आज़ादी के बाद पहली बार गांव पहुंची बिजली

कभी PLGA बटालियन-1 का गढ़ रहा इलाका अब मुख्यधारा से जुड़ा
सुकमा-बीजापुर सीमा के दुर्गम इलाके में विकास की नई सुबह
सुकमा। कभी नक्सलियों के सबसे सुरक्षित ठिकानों में गिने जाने वाले सुकमा-बीजापुर सीमावर्ती क्षेत्र के ग्राम गुंडराजगुड़ेम में अब अंधेरा नहीं, बल्कि विकास की रोशनी पहुंच चुकी है। आज़ादी के दशकों बाद पहली बार गांव में बिजली पहुंची है। सुरक्षा बलों, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के संयुक्त प्रयासों से यहां ट्रांसफार्मर स्थापना और विद्युत लाइन विस्तार का काम पूरा हुआ, जिसके बाद गांव में सफलतापूर्वक विद्युत आपूर्ति शुरू कर दी गई।

यह सिर्फ बिजली पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलाव की तस्वीर है, जहां कभी बंदूक और बारूद का साया था, वहां अब विकास की किरणें पहुंच रही हैं। लंबे समय तक माओवादियों का प्रभाव रहने के कारण यह इलाका विकास से पूरी तरह कट चुका था। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं यहां के लोगों के लिए सपना बनी हुई थीं।
सुरक्षा कैंप बने तो खुला विकास का रास्ता
गुंडराजगुड़ेम और आसपास का क्षेत्र माओवादियों की PLGA बटालियन-1 का मजबूत गढ़ माना जाता था। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां और नक्सलियों का दबदबा विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा थे।जिला पुलिस सुकमा और CRPF ने लगातार अभियान चलाकर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। मानसून जैसे चुनौतीपूर्ण समय में भी सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, जिससे प्रशासन और विभागीय टीमों को गांव तक पहुंचने का रास्ता मिला। सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ऐसा माहौल तैयार किया, जहां वर्षों से ठप पड़े विकास कार्य फिर शुरू हो सके।
दुर्गम जंगलों के बीच पहुंचा ट्रांसफार्मर
घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच विद्युत विभाग की टीम ने गांव तक बिजली पहुंचाने का काम पूरा किया। ट्रांसफार्मर स्थापना और लाइन विस्तार का कार्य आसान नहीं था, लेकिन सुरक्षा बलों के संरक्षण में यह संभव हो पाया।जब गांव में पहली बार बिजली जली तो ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का सबसे ऐतिहासिक दिन बताया। ग्रामीणों ने प्रशासन, पुलिस और CRPF के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब उनका गांव भी देश की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।
बिजली से बदल जाएगी गांव की तस्वीर
बिजली पहुंचने के साथ ही गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। अब बच्चों की पढ़ाई लालटेन के सहारे नहीं होगी, मोबाइल नेटवर्क और संचार सुविधाएं बेहतर होंगी, वहीं ग्रामीणों को छोटे रोजगार और व्यवसाय के अवसर भी मिल सकेंगे।
नक्सलगढ़ से विकासगढ़ की ओर बढ़ता कदम: गुंडराजगुड़ेम में बिजली पहुंचना केवल एक सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित बस्तर में बदलते हालात की बड़ी तस्वीर है। यह उस भरोसे का प्रतीक है, जिसमें सुरक्षा और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।कभी जहां नक्सलियों का खौफ था, वहां अब विकास की रोशनी पहुंच चुकी है। गुंडराजगुड़ेम में जली यह पहली बिजली सिर्फ बल्ब नहीं जला रही, बल्कि वर्षों से अंधेरे में जी रहे लोगों की उम्मीदों को भी रोशन कर रही है।



