ड्राइवरों की 12 नवंबर की प्रस्तावित हड़ताल पर ट्रांसपोर्टरों का रुख स्पष्ट, जायज मांगों का समर्थन लेकिन जबरन गाड़ियां रोकने का विरोध

रायपुर- छत्तीसगढ़ में ड्राइवरों के अखिल भारतीय संगठन द्वारा 12 नवंबर को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने अपना रुख स्पष्ट किया है। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के ट्रांसपोर्ट विंग के प्रदेश महामंत्री सुखदेव सिंह सिद्धू ने कहा है कि ड्राइवरों की मांगें जायज हैं और उनके अधिकारों एवं हितों से जुड़ी हैं, तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। ऐसी मांगों को ट्रांसपोर्टरों का नैतिक समर्थन रहेगा। हालांकि, उन्होंने संबंधित संगठनों से चर्चा किए बिना एकतरफा हड़ताल का आह्वान करने पर आपत्ति जताई है।
बरसात में नुकसान, अब काम शुरू होने की उम्मीद
सुखदेव सिंह सिद्धू ने कहा कि इस वर्ष बरसात के दौरान तीन से चार महीने तक परिवहन व्यवसाय प्रभावित रहा। इस कारण अधिकांश ट्रक मालिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ट्रक खड़े रहने के बावजूद बैंक की किस्तें, बीमा, टैक्स, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों का भुगतान करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि दिवाली के बाद परिवहन व्यवसाय में धीरे-धीरे काम शुरू होने की उम्मीद है। ट्रक मालिकों को आशा है कि कारोबार गति पकड़ने से बरसात के दौरान हुए नुकसान की भरपाई हो सकेगी और लंबित देनदारियों का भुगतान किया जा सकेगा। ऐसे समय में हड़ताल होने से परिवहन कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों से चर्चा नहीं होने पर जताई आपत्ति
सिद्धू ने कहा कि प्रस्तावित हड़ताल के संबंध में अभी तक छत्तीसगढ़ के ट्रक ओनर एसोसिएशनों और ट्रांसपोर्ट संगठनों के साथ औपचारिक चर्चा नहीं की गई है और न ही उनसे समर्थन मांगा गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े आंदोलन से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेना जरूरी है। बातचीत और आपसी समन्वय के बिना लिए गए फैसले से पूरे परिवहन उद्योग पर असर पड़ सकता है।
ड्राइवरों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं की निंदा
पिछली हड़तालों के दौरान ड्राइवरों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं पर भी सुखदेव सिंह सिद्धू ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में ड्राइवरों का मुंह काला करने, जूतों की माला पहनाने, गाली-गलौज करने और मारपीट जैसी घटनाएं सामने आई थीं। किसी भी व्यक्ति के साथ ऐसा अपमानजनक व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी को भी कानून हाथ में लेने, हिंसा करने या दूसरे व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
अपनी इच्छा से काम करने वाले ड्राइवरों को न रोका जाए
सुखदेव सिंह सिद्धू ने स्पष्ट किया कि जो ड्राइवर अपनी इच्छा से हड़ताल का समर्थन करना चाहते हैं, वे वाहन नहीं चलाने का निर्णय ले सकते हैं। वहीं, जो ड्राइवर काम करना चाहते हैं और अपनी आजीविका के लिए वाहन चलाना चाहते हैं, उन्हें जबरन रोकना, धमकाना, मारपीट करना या गाड़ियां खड़ी करवाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन में सभी की स्वतंत्रता और आजीविका का सम्मान होना चाहिए। विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए।
बातचीत से निकले समाधान, परिवहन उद्योग को न हो नुकसान
सिद्धू ने कहा कि ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर परिवहन व्यवसाय के महत्वपूर्ण अंग हैं और दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए ड्राइवर संगठनों और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों को बैठक कर आपसी सहमति बनाने का प्रयास करना चाहिए।उन्होंने दोहराया कि ड्राइवरों की जायज मांगों का समर्थन करने के साथ ट्रक मालिकों की आजीविका और परिवहन कारोबार को सुचारु बनाए रखना भी जरूरी है। संवाद, सहयोग और आपसी सम्मान से ही परिवहन उद्योग को मजबूत बनाया जा सकता है।



