
रायपुर। बस्तर दशहरा के आयोजन में कथित अव्यवस्थाओं और पारंपरिक रस्मों को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार जैसी ऐतिहासिक परंपराओं को मजाक बनाकर रख दिया है।
‘मुरिया दरबार को मजाक बना दिया’
दीपक बैज ने कहा कि मुरिया दरबार आम जनता का दरबार है, लेकिन इस बार आयोजन के दौरान जिस तरह की स्थिति सामने आई, उससे परंपरा की गरिमा प्रभावित हुई है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर दौरे का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि उनके आने से बस्तर को क्या मिला।
पारंपरिक रस्मों और कारीगरों को लेकर उठाए सवाल
PCC प्रमुख ने आरोप लगाया कि बस्तर दशहरा की पारंपरिक रस्मों से जुड़े लोगों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि ‘जोगी बिठाई’ की रस्म से जुड़े व्यक्ति को हटा दिया गया और रथ निर्माण करने वाले कारीगरों को भी वहां से भगा दिया गया।
बैज ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे में इससे जुड़ी पारंपरिक व्यवस्थाओं और रस्मों का सम्मान किया जाना चाहिए।
रथ खींचने के दौरान मौत पर सरकार को घेरा
दीपक बैज ने रथ खींचने के दौरान एक आदिवासी व्यक्ति की दबने से मौत और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद सरकार का कोई प्रतिनिधि पीड़ितों को देखने तक नहीं गया।
उन्होंने आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
काचना देवी की अनुमति और धार्मिक परंपरा का मुद्दा
बैज ने कहा कि बस्तर दशहरा की परंपराओं में काचना देवी से अनुमति लेने की रस्म का विशेष महत्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजन से जुड़े कुछ पारंपरिक अनुष्ठानों और उनके चित्रण को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने पनका समाज की बच्ची से जुड़ी परंपरा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि समाज की पारंपरिक भूमिका निभाने वाली बच्ची को सामने नहीं लाया गया और उसकी जगह दूसरी बच्ची को प्रस्तुत किया गया। उनके मुताबिक, इस मामले से पनका समाज में नाराजगी है।
सरकार से माफी मांगने की मांग
PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बस्तर की संस्कृति और परंपराओं के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले पर जवाब देने और संबंधित समाज से माफी मांगने की मांग की।बस्तर दशहरा से जुड़े इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन और राज्य सरकार का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।




