डिजिटल तकनीक से न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव, नए आपराधिक कानूनों से मिलेगा त्वरित न्याय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है।
राजधानी रायपुर में आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू किए गए हैं। इन कानूनों में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को कानूनी मान्यता देकर न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा शुरू होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई गति मिलेगी। ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बन रही है।उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी पुलिस थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं और अब तक 1,97,547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं साइबर अपराधों से निपटने के लिए राज्य में 9 नए साइबर थाने भी शुरू किए गए हैं।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की न्याय व्यवस्था अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने बताया कि जून माह में जिला न्यायालयों में 9,910 मामलों और उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि कार्यशाला न्याय व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने “वन डेटा, वन एंट्री” की अवधारणा पर जोर देते हुए एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य और न्याय श्रुति जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


