छत्तीसगढ़

Follow-up Investigation: बिलासपुर Snake Bite Scam: अस्पताल से तहसील तक फैला था फर्जीवाड़े का नेटवर्क, 19 गिरफ्तार, 2 आरक्षकों की गिरफ्तारी से नए खुलासे

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित स्नेक बाइट (सर्पदंश) मुआवजा घोटाले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अस्पताल से लेकर पुलिस चौकी और तहसील कार्यालय तक फैले कथित नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश करने का दावा किया है। मामले में अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी, तहसील कर्मचारियों, वकील और अन्य लोगों समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

WhatsApp Image 2026 09 22 at 9.10.11 PM

ताजा कार्रवाई में सिम्स पुलिस चौकी में पदस्थ आरक्षक रामकुमार पाटनवार और रामेश्वर भास्कर को गिरफ्तार किया गया है। जांच के अनुसार दोनों पर गिरोह तक मौत की सूचना पहुंचाने का आरोप है।ऐसे काम करता था पूरा नेटवर्कपुलिस जांच के मुताबिक, किसी व्यक्ति की मौत के बाद जब शव पोस्टमार्टम के लिए सिम्स अस्पताल पहुंचता था, तब गिरोह को इसकी सूचना दी जाती थी। इसके बाद गिरोह के सदस्य मृतक के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी मुआवजा दिलाने का लालच देते थे।

आरोप है कि बीमारी, कैंसर, आत्महत्या या अन्य कारणों से हुई मौतों को दस्तावेजों में सर्पदंश से हुई मौत दर्शाया जाता था। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कराई जाती थी। सरकारी आपदा राहत के रूप में मिलने वाली मुआवजा राशि का हिस्सा गिरोह और कुछ मामलों में परिजनों के बीच बांटा जाता था।

फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला राजइस घोटाले की परतें वर्ष 2025 के एक मामले से खुलनी शुरू हुईं। बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई मौत को कथित तौर पर सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस मामले में पहले ही डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक वकील को गिरफ्तार किया जा चुका है।

तहसील कार्यालय तक पहुंची जांच

जांच में एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई। पुलिस ने नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और हरिशंकर राठौर को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मुआवजा प्रक्रिया में दस्तावेजों के स्तर पर अनियमितताएं की गईं।

लिपिक संघ ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल: इधर, लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने कर्मचारियों की गिरफ्तारी का विरोध किया है। संघ का कहना है कि सर्पदंश मुआवजा प्रक्रिया में पुलिस पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पटवारी प्रतिवेदन के बाद मामला तहसीलदार और एसडीएम के माध्यम से आगे बढ़ता है तथा अंतिम निर्णय सक्षम राजस्व अधिकारी लेते हैं।

संघ का आरोप है कि केवल लिपिकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि प्रक्रिया में शामिल अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से समान स्तर पर पूछताछ नहीं हुई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अब तक गिरफ्तार 19 आरोपी

1- महेंद्र कुमार मनहर

2- गोविंद विश्वकर्मा

3- हीरा प्रसाद खांडेकर

4- कुश कुमार गुप्ता

5 – भगत सिंह ठाकुर

6- शंकू सिंह ठाकुर

7 – धर्मेंद्र यादव

8 – विजय जांगड़े

9 – आकाश कुमार साहू

10 – केशव कुमार कश्यप

11 – कामता साहू (अधिवक्ता)

12 – शिव कुमारी यादव

13- दामिनी यादव

14 – सफीना बानो

15 – संतोष कुमार सूर्यवंशी

16 – रंजीत कुमार चतुर्वेदी

17 – सुनीता सोनवानी

18- आरक्षक रामकुमार पाटनवार

19- आरक्षक रामेश्वर भास्कर

cropped cg bulletin favicon
CG Bulletin Desk1

Show More

Related Articles

Back to top button
Home
Chhattisgarh
Search