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Mahadev Betting App: ओमान में गिरफ्तार सौरभ चंद्राकर के पास मिला फर्जी पासपोर्ट, श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस के नाम का इस्तेमाल करने का दावा

जांच एजेंसियां कर रहीं फर्जी पहचान और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पड़ताल, प्रत्यर्पण से बचने की साजिश की आशंका

रायपुर/नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच में नया मोड़ आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसके पास से एक कथित फर्जी पासपोर्ट मिला है, जिसमें तस्वीर सौरभ की है, लेकिन नाम श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस का दर्ज है। जांच एजेंसियां इस दस्तावेज की सत्यता की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने में जुटी हैं कि इसका इस्तेमाल किस नेटवर्क के जरिए किया गया।

फर्जी पासपोर्ट से ओमान में प्रवेश का दावा

प्रारंभिक जांच के अनुसार, सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर इसी फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया था। दस्तावेज में उसे दक्षिण-पूर्व एशियाई नागरिक के रूप में दर्शाया गया है। पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी होना और 21 जून 2034 तक वैध होना बताया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह दस्तावेज कैसे तैयार हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

अलग-अलग दस्तावेज, अलग पहचान: जांच में यह भी सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने पहले वानूआतू की नागरिकता हासिल की थी। उस दस्तावेज में सौरभ की जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 दर्ज थी, जबकि कथित फर्जी पासपोर्ट में जन्मतिथि 11 मार्च 1998 बताई गई है। अलग-अलग पहचान और जन्मतिथियों ने जांच एजेंसियों के संदेह को और मजबूत किया है।

प्रत्यर्पण से बचने की रणनीति?

अधिकारियों को आशंका है कि अलग-अलग पहचान और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल भारत में कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को जटिल बनाने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

इंटरपोल ने नहीं हटाया रेड नोटिस: सौरभ चंद्राकर ने इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) में अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की याचिका दायर की थी। उनका दावा था कि भारत में उनके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है, लेकिन CCF ने यह याचिका खारिज कर दी। आयोग ने माना कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।

सौरभ चंद्राकर वर्ष 2019 से फरार बताया जाता है। वर्ष 2024 में उसे दुबई में इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया। भारत ने उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध भी भेजा था, जिस पर उस समय अमल नहीं हो सका।

अब ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां उसके भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर भी नजर बनाए हुए हैं।

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CG Bulletin Desk1

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