रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ, CM साय बोले गणतंत्र के अमृतकाल में साहित्य उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

राष्ट्र निर्माण की बुनियाद में साहित्य की रही है निर्णायक भूमिका : उप सभापति हरि
रायपुर। राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में शुक्रवार को रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
उद्घाटन कार्यक्रम विनोद कुमार शुक्ल मंडप में आयोजित किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

पुस्तकों का हुआ विमोचन: उद्घाटन समारोह में अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकारों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक, जे. नंदकुमार की पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की कृति तेरा राज नहीं आएगा रे का लोकार्पण किया गया।
साहित्य समाज को दिशा देता है
उप सभापति हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की परंपरा अत्यंत समृद्ध और प्राचीन रही है। रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन रचनात्मक दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कबीर के छत्तीसगढ़ से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की ताकत रखते हैं। साहित्य आशा, साहस और सामाजिक चेतना को जागृत करता है तथा निराशा से बाहर निकलने की प्रेरणा देता है।
उप सभापति ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। इस राष्ट्रीय शक्ति के निर्माण में साहित्य की भूमिका सदैव निर्णायक रही है।
साहित्य उत्सव हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन हम सभी के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के अनुरूप आयोजित किया गया है।मुख्यमंत्री ने बताया कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में देशभर से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं और कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत दिया। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी, माधवराव सप्रे, पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्सव के विभिन्न मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे साहित्यकारों को समर्पित किया गया है।
बसंत पंचमी पर साहित्य का महाकुंभ
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित इस आयोजन को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है।
युवाओं की रही विशेष भागीदारी: उद्घाटन के पश्चात साहित्यकारों और अतिथियों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली।रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है।




