
नई दिल्ली। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2025 के अनुसार छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर केवल 2.3 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
यह उपलब्धि प्रदेश की मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगारोन्मुखी नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाती है। राज्य सरकार द्वारा खेती, वनोपज, स्वरोजगार और लघु उद्यमों को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं।सरकार की योजनाओं के तहत समर्थन मूल्य पर वनोपज खरीदी, स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन, कुटीर उद्योगों के विस्तार और कौशल विकास कार्यक्रमों ने युवाओं एवं महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और पलायन में कमी आई है।
राज्य सरकार कौशल उन्नयन, उद्यमिता विकास और निवेश आधारित औद्योगिक विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। नई औद्योगिक नीति के चलते प्रदेश में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर युवा, किसान, महिला और श्रमिक को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनहितकारी योजनाओं और सुशासन के बल पर छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के अग्रणी विकासशील राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।




