विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखना हमारा दायित्व : CM साय

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री ने निकाला मौन जुलूस, विस्थापित परिवारों के संघर्ष को किया नमन
रायपुर। विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल देश की सीमाओं और भू-भाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह लाखों लोगों के लिए गहरी मानवीय पीड़ा और विस्थापन की त्रासदी थी। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को अक्षुण्ण रखना हम सभी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को रायपुर स्थित संचालनालय पुरातत्व के मुक्ताकाशी मंच में आयोजित ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान विभाजन में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष, साहस और धैर्य को नमन किया गया।
लाखों लोगों ने झेली विस्थापन की पीड़ा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विभाजन के दौरान बंगाली, सिख और सिंधी समाज सहित अनेक समुदायों के लाखों परिवारों को अपनी जन्मभूमि, घर-बार और अपनों से बिछड़ना पड़ा। लोगों ने अपना सब कुछ पीछे छोड़कर नए स्थानों पर लगभग शून्य से जीवन शुरू किया।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद विस्थापित परिवारों ने अपने परिश्रम और जीवटता से खुद को फिर से स्थापित किया तथा देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
नई पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय के बाद 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विभाजन में प्राण गंवाने वाले लोगों को सम्मान देना और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को याद करना है।
उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करना केवल अतीत की पीड़ा को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को सुरक्षित करना है। आने वाली पीढ़ियों को यह जानना जरूरी है कि स्वतंत्रता के साथ देश को कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी का सामना करना पड़ा था।
मौन जुलूस में शामिल हुए मुख्यमंत्री

कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय संचालनालय पुरातत्व से अंबेडकर चौक तक निकाले गए मौन जुलूस में शामिल हुए। जुलूस के माध्यम से विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और विस्थापित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।मौन जुलूस में जनप्रतिनिधियों, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने दिया एकता का संदेश
समारोह के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि समाज संगठित रहेगा तो राष्ट्र भी संगठित रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
डॉ. द्विवेदी ने विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों के संघर्ष को इतिहास में उचित स्थान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपना घर, संपत्ति और अपनों को खोया, उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खड़ा किया और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया।
उन्होंने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके प्रभाव और उससे मिली सीख को समझना आज भी आवश्यक है, ताकि समाज को बांटने वाली शक्तियों के प्रति देश सजग रहे।




