CGMSC की टेंडर प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, हाईकोर्ट का ₹1 लाख जुर्माना रद्द

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की टेंडर प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें CGMSC पर 1 लाख रुपये का हर्जाना लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निगम की टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर विराम लग गया है।
ठेकेदार की शिकायत के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
मामला एक टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा था। एक ठेकेदार ने टेंडर से संबंधित शिकायत को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CGMSC पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके खिलाफ CGMSC ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
सुप्रीम कोर्ट ने माना- निगम की नहीं थी गलती:सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि CGMSC की ओर से टेंडर प्रक्रिया में कोई ऐसी गलती नहीं की गई थी, जिसके आधार पर निगम को जिम्मेदार ठहराया जाए।अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि संबंधित ठेकेदार ने टेंडर फॉर्म में अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी दर्ज की थी। निगम की ओर से आवश्यक जानकारी और संबंधित संदेश उसी ईमेल आईडी पर निर्धारित समय के भीतर भेजे गए थे।
इसके बावजूद ठेकेदार की ओर से तय समय सीमा में आवश्यक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद टेंडर की शर्तों और निर्धारित नियमों के अनुसार उसे प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
हाईकोर्ट का ₹1 लाख हर्जाना सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द:सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले के तथ्यों और प्रक्रिया की जांच के बाद माना कि CGMSC ने निर्धारित नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की थी। ऐसे में निगम पर लगाया गया 1 लाख रुपये का हर्जाना उचित नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के संबंधित आदेश को रद्द कर दिया।
स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता पर जोर:सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CGMSC ने कहा है कि निगम आगे भी राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए पारदर्शी एवं नियमसम्मत तरीके से काम करता रहेगा। निगम की ओर से टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पारदर्शिता का पालन जारी रखने की बात कही गई है।
इस फैसले को CGMSC की टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




