
रायपुर। झीरम घाटी कांड की एनआईए जांच पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार किया है। सीएम साय ने कहा कि भूपेश बघेल करीब पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उस दौरान उन्होंने मामले में कुछ ठोस नहीं किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि “भूपेश बघेल पांच साल मुख्यमंत्री रहे। उस दौरान झीरम का प्रमाण जेब में लेकर घूमने की बात करते थे। वे सिर्फ बोलते रह गए। उन्हें मुख्यमंत्री रहते कुछ करना था।”
सीएम साय ने कहा कि झीरम घाटी हमले में कांग्रेस पार्टी ने अपने कई बड़े नेताओं को खोया है। अगर भूपेश बघेल को इस मामले की जांच की वास्तव में चिंता थी, तो अपने पांच साल के कार्यकाल में उन्हें इस दिशा में कुछ न कुछ करना चाहिए था।
नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बोले CM साय
सशस्त्र माओवाद के समाप्त होने के बाद नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए कमेटी बनी हुई है। किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए जितनी आवश्यकता होती है, कमेटी की सिफारिश के आधार पर उतनी सुरक्षा मुहैया कराई जाती है।
भूपेश बघेल ने NIA जांच पर उठाए थे सवाल
बता दें कि कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने बस्तर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले में एनआईए की जांच पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि एफआईआर में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और घटना के समय मौके पर मौजूद लोगों के बयान भी नहीं लिए गए।
बघेल ने कहा था कि झीरम हमले के पीछे के षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में जांच नहीं हुई। उन्होंने मौजूदा भाजपा सरकार पर भी मामले की आगे जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया और कहा कि इससे ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार मामले को दबाना चाहती है।
झीरम घाटी हमले को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एनआईए कोर्ट के फैसले को लेकर भी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।




