छत्तीसगढ़

‘संवाद’ में बड़ी कार्रवाई: 25 साल से जमे अधिकारी की छुट्टी, प्रिंटिंग-होर्डिंग मामले में 8 प्रिंटरों पर शिकंजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की संस्था ‘संवाद’ में प्रिंटिंग और होर्डिंग से जुड़े पुराने सिस्टम को लेकर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश के बाद विभाग ने व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई तेज की है। इसी कड़ी में संवाद में करीब 25 वर्षों से प्रिंटिंग विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सब्यसाची कर को सेवा से बर्खास्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

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बताया गया है कि सब्यसाची कर की नियुक्ति को लेकर वर्ष 2011 में ही एक जांच समिति ने आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार समिति ने उनकी नियुक्ति को नियमों के अनुरूप नहीं माना था। इसके बावजूद मामला लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ा। अब सरकार की कार्रवाई के बाद एक बार फिर पुरानी जांच और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

होर्डिंग व्यवस्था पर भी कसा शिकंजा

कार्रवाई केवल प्रिंटिंग तक सीमित नहीं है। संवाद की होर्डिंग व्यवस्था में भी कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद सख्ती बढ़ाई गई है।आरोप है कि कुछ मामलों में सरकारी विज्ञापन वाले होर्डिंग निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही हटा दिए जाते थे और उनकी जगह निजी विज्ञापन लगा दिए जाते थे। इसके बावजूद सरकारी विज्ञापन का पूरा भुगतान लेने की शिकायतें सामने आई थीं। अब होर्डिंग की वास्तविक स्थिति, तय अवधि और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

33.74 करोड़ के पुस्तक प्रिंटिंग कार्य में गड़बड़ी का आरोप

मामले का एक बड़ा हिस्सा समग्र शिक्षा विभाग की पुस्तकों की छपाई से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक संवाद को पुस्तकों की प्रिंटिंग की जिम्मेदारी दी गई थी और 6 फरवरी 2026 को 10 प्रकाशकों को कार्यादेश जारी किए गए थे. रिपोर्टों के मुताबिक इनमें से 8 प्रिंटरों पर तय मानकों के अनुरूप किताबें नहीं छापने के आरोप लगे। इनमें किताबों का आकार कम करने, कम GSM वाले कागज का इस्तेमाल करने और निर्धारित संख्या से कम किताबें छापने जैसी अनियमितताएं शामिल हैं.

बताया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब 33.74 करोड़ रुपये के काम से जुड़े सवाल उठे हैं और कथित गड़बड़ियों से सरकार को लगभग 10 करोड़ रुपये तक के नुकसान का अनुमान जताया गया है।

सैंपल कुछ और, सप्लाई कुछ और?

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रिंटरों द्वारा पहले जांच के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप किताबों का सैंपल उपलब्ध कराया जाता था। इसके बाद जिलों में भेजी जा रही किताबों की गुणवत्ता और आकार में कथित तौर पर अंतर पाया गया।इसी तरह की आशंका को देखते हुए इस बार परिवहन के दौरान गोपनीय तरीके से किताबों की सैंपलिंग कराई गई। जांच में 10 में से 8 प्रिंटरों की सप्लाई में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात कही गई है।

पहली बार बिल से साढ़े तीन करोड़ रुपये की कटौती

कथित अनियमितताओं पर संवाद प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रिंटरों के भुगतान पर कार्रवाई की। रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार प्रिंटरों के बिल से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की कटौती की गई है।इस कार्रवाई के बाद प्रिंटिंग कार्य की गुणवत्ता और सप्लाई की जांच को लेकर व्यवस्था और सख्त किए जाने की बात सामने आई है।

टेंडर प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

रिपोर्टों के अनुसार, प्रिंटरों द्वारा आगामी टेंडर को प्रभावित करने के लिए आपस में धन जुटाकर एक होटल में कार्यालय संचालित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि इस व्यवस्था को लेकर आपसी विवाद के बाद मामला सामने आया और इसके बाद संबंधित टेंडर को निरस्त कर दिया गया।

तीन जिलों के PRO को नोटिस: मामले में विभागीय स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। काम में लापरवाही के आरोप में तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।अधिकारियों से उनके स्तर पर हुई लापरवाही को लेकर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आगे विभागीय कार्रवाई की संभावना जताई गई है।

लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था पर पहली बड़ी चोट

‘संवाद’ में हुई इस कार्रवाई को प्रिंटिंग और होर्डिंग से जुड़ी पुरानी व्यवस्था में बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। एक ओर करीब 25 वर्षों से जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी को हटाया गया है, वहीं दूसरी ओर पुस्तक प्रिंटिंग में कथित अनियमितताओं को लेकर 8 प्रिंटर कार्रवाई के दायरे में आए हैं।

अब निगाह इस बात पर है कि जांच आगे किस स्तर तक पहुंचती है और कथित अनियमितताओं में जिम्मेदारी तय होने के बाद सरकार की ओर से और क्या कार्रवाई की जाती है।

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CG Bulletin Desk1

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