इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11 वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और सीएम साय

1880 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 13 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले
“ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीक से खेती को नई दिशा दें युवा”- CM साय
रायपुर। Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya का 11वाँ दीक्षांत समारोह आज संपन्न हुआ। समारोह में राज्यपाल Ramen Deka और मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के कुल 1880 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 128 शोधार्थियों को पीएचडी, 518 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विद्यार्थियों को स्नातक उपाधि दी गई। साथ ही मेधावी छात्रों को 13 स्वर्ण, 7 रजत और 2 कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में राज्यपाल डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन समय की बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि सीमित होती कृषि भूमि के बीच कम जमीन में अधिक उत्पादन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग भविष्य की जरूरत है।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि कृषि अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। उन्होंने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उपग्रह मानचित्रण, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए युवाओं से आधुनिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन अब बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान उत्पादन और प्राकृतिक खेती पर भी फोकस करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश सरकार खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता और मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आह्वान किया।
समारोह में कुलपति Girish Chandel ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
दीक्षांत समारोह में कृषि मंत्री Ramvichar Netam और कृषि वैज्ञानिक Ashok Kumar Singh, विधायक Anuj Sharma सहित कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं अभिभावक मौजूद रहे।




